आसनसोल में वेदांता का ₹80,000 करोड़ तक निवेश का प्रस्ताव, 10 हजार लोगों को मिल सकता है रोजगार
बिजली उत्पादन और एल्युमीनियम प्लांट लगाने की योजना पर चर्चा, बिधानबाग की जमीन पर भी विचार; अब व्यवहार्यता अध्ययन पर टिकी
शिल्पांचल टुडे, आसनसोल।
पश्चिम बंगाल के औद्योगिक क्षेत्र के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। देश के प्रमुख उद्योग समूहों में शामिल वेदांता ग्रुप पश्चिम बंगाल में ₹70,000 करोड़ से ₹80,000 करोड़ तक निवेश की संभावनाएं तलाश रहा है। इस प्रस्ताव के तहत बिजली उत्पादन संयंत्र और एल्युमीनियम स्मेल्टर प्लांट स्थापित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। आसनसोल को संभावित स्थान के रूप में देखा जा रहा है। यदि परियोजना आगे बढ़ती है, तो इससे क्षेत्र के औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद सामने आया प्रस्ताव
वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने 28 अक्टूबर को कोलकाता में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। बैठक में राज्य में बड़े औद्योगिक निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि वेदांता समूह आसनसोल में एक औद्योगिक इकाई स्थापित करने में रुचि रखता है। उनके अनुसार, प्रस्तावित परियोजना से लगभग 10,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। राज्य सरकार ने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सहयोग देने की बात कही है।
बिधानबाग में प्लांट लगाने पर विचार
रिपोर्टों के अनुसार, वेदांता समूह की सहयोगी कंपनी BALCO के पास आसनसोल के निकट बिधानबाग में लगभग 270–300 एकड़ जमीन है। इस जमीन का इस्तेमाल प्रस्तावित परियोजना के लिए किया जा सकता है। हालांकि, प्लांट के आकार और जरूरतों के आधार पर अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता भी पड़ सकती है।
बिधानबाग पहले भी एल्युमीनियम उद्योग से जुड़ा रहा है। ऐसे में इस क्षेत्र में नई औद्योगिक गतिविधि शुरू होने की संभावना से स्थानीय उद्योग जगत की नजर इस प्रस्ताव पर बनी हुई है। हालांकि, जमीन के इस्तेमाल और परियोजना के अंतिम स्थान को लेकर अभी अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।
बिजली और एल्युमीनियम उत्पादन पर रहेगा जोर
प्रस्तावित निवेश में दो प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं:
बिजली उत्पादन संयंत्र
एल्युमीनियम स्मेल्टर प्लांट
एल्युमीनियम उत्पादन में बिजली की बड़ी भूमिका होती है। इसके अलावा कोयले, पानी, परिवहन और कच्चे माल की नियमित उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है।
अनिल अग्रवाल के अनुसार, समूह पहले प्रस्तावित परियोजनाओं की व्यवहार्यता का अध्ययन करेगा। ओडिशा में समूह की मौजूदा इकाइयों से एल्युमिना जैसे कच्चे माल की आपूर्ति और रेल संपर्क के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है।
10 हजार नौकरियों के साथ सहायक उद्योगों की भी संभावना
यदि परियोजना स्थापित होती है, तो इसका लाभ केवल मुख्य प्लांट तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। एल्युमीनियम उत्पादन से जुड़े सहायक उद्योगों के विकास के अवसर भी बन सकते हैं।
मशीनरी, औद्योगिक उपकरण, परिवहन, रखरखाव, पैकेजिंग और एल्युमीनियम से उत्पाद बनाने वाली इकाइयों में काम के अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे स्थानीय कारोबार और औद्योगिक आपूर्ति व्यवस्था को भी लाभ मिलने की संभावना है।
हालांकि, इन सहायक उद्योगों में कितने रोजगार पैदा होंगे, इसका कोई अंतिम आंकड़ा अभी तय नहीं है। फिलहाल मुख्यमंत्री ने मुख्य परियोजना से लगभग 10,000 प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना जताई है।
अगले तीन वर्षों में शुरू हो सकता है काम?
अनिल अग्रवाल ने संकेत दिया है कि राज्य सरकार का सक्रिय सहयोग मिलने पर परियोजनाएं अगले तीन वर्षों के भीतर चालू करने का लक्ष्य रखा जा सकता है। लेकिन इसके लिए कई महत्वपूर्ण चरण पूरे करने होंगे।
इनमें शामिल हैं:
परियोजना की व्यवहार्यता का अध्ययन।
जमीन और बुनियादी ढांचे की जरूरतों का आकलन।
कोयले और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
पर्यावरण सहित आवश्यक सरकारी मंजूरियां प्राप्त करना।
निवेश और निर्माण से संबंधित अंतिम निर्णय लेना।
इसलिए फिलहाल निवेश की राशि और रोजगार के आंकड़ों को प्रस्तावित योजना के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि शुरू हो चुकी परियोजना के रूप में।
आसनसोल के औद्योगिक भविष्य के लिए क्यों अहम है यह प्रस्ताव?
आसनसोल और आसपास का क्षेत्र लंबे समय से कोयला, इस्पात, बिजली और अन्य औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। ऐसे में बड़े निवेश की यह संभावना क्षेत्र में नए उद्योगों, स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं और कुशल श्रमिकों के लिए अवसर पैदा कर सकती है।
स्थानीय युवाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल होगा कि प्रस्तावित परियोजना आगे बढ़ने पर भर्ती कब शुरू होगी, किन तकनीकी योग्यताओं की जरूरत होगी और स्थानीय लोगों को रोजगार में कितना अवसर मिलेगा।
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि वेदांता ने निवेश की संभावनाओं पर विचार करने की बात कही है। अब परियोजना के भविष्य का फैसला व्यवहार्यता अध्ययन, जमीन, संसाधनों और जरूरी सरकारी मंजूरियों पर निर्भर करेगा।














