आस्था का महासंगम! आसनसोल के प्रसिद्ध ली क्लब प्रभु छठ घाट पर भूमि पूजन के साथ शुरू हुई 49वें साल की तैयारी, भव्य और दिव्य होगा आयोजन
शिल्पांचल टुडे, आसनसोल।
सनातन धर्म के सबसे कठिन और पवित्र पर्व, चार दिवसीय श्री श्री रवि षष्ठी छठ महापर्व का काउंटडाउन शुरू हो गया है। इस साल यह महापर्व 13 नवंबर से 16 नवंबर 2026 तक पूरे विश्व में धूमधाम से मनाया जाएगा।
और जब छठ की बात आती है तो पश्चिम बंगाल के आसनसोल स्थित ली क्लब प्रभु छठ घाट का नाम सबसे ऊपर आता है। आस्था, सेवा और भव्यता का दूसरा नाम बन चुका यह घाट इस साल अपना 49वां वर्ष मनाने जा रहा है।
भूमि पूजन के साथ हुई भव्य तैयारियों की शुरुआत
49वें साल को यादगार, भव्य और दिव्य बनाने के लिए शनिवार को कल्ला प्रभु छठ घाट पर विधि-विधान से भूमि पूजन का आयोजन किया गया।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिल्पांचल के विशिष्ट पुरोहित बागीश तिवारी ने भूमि पूजन कराया। इस पवित्र मौके पर ली क्लब के सचिव कृष्णा प्रसाद, विजय प्रकाश, अमूल दास, सुदीप पांडे, राजीव कुशवाहा, विवेक सिंह, राजेश प्रसाद, रवि प्रसाद, गणेश यादव, विनोद प्रसाद, किरण बाउरी, अशोक तिवारी, संतोष ठाकुर, प्राण गोप, सुशांत घोष, नीरज बर्नवाल, मुकेश श्रीवास्तव, तुलसी मंडल, रंजीत दास, संतोष मंडल सहित सभी कर्मठ सदस्य, पदाधिकारी और शहर के कई गणमान्य धार्मिक लोग मौजूद रहे। सभी ने एक साथ छठी मैया से सफल आयोजन की प्रार्थना की।
49वां साल होगा सबसे ऐतिहासिक – सचिव
ली क्लब के सचिव कृष्णा प्रसाद ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रभु छठ घाट की सेवा का यह 49वां साल है, और इसे हम सबसे भव्य तरीके से मनाएंगे।
उन्होंने कहा, “छठी मैया से हम सभी श्रद्धालुओं और देशवासियों के मंगल की कामना करते हैं। हमारा संकल्प है कि इस बार घाट को इतना सुंदर बनाया जाए कि देखने वाले देखते रह जाएं।”
सचिव ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं –
1. घाट की सफाई: पूरे घाट परिसर की विशेष सफाई, रंग-रोगन और सजावट
2. नदी की सफाई: नदी के पानी को पूरी तरह स्वच्छ किया जाएगा ताकि व्रतियों को अर्घ्य देने में कोई परेशानी न हो
3. सुरक्षा और सुविधा: महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था, लाइटिंग, बैरिकेडिंग और बैठने की उत्तम व्यवस्था
4. भव्य सजावट: पूरे घाट को फूलों, लाइटों और तोरण द्वारों से दुल्हन की तरह सजाया जाएगा
आसनसोल के इस प्रसिद्ध घाट पर हर साल हजारों श्रद्धालु सूर्यदेव को अर्घ्य देने आते हैं। 49 सालों से लगातार हो रही निस्वार्थ सेवा ने इस घाट को पूरे बंगाल में आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बना दिया है।













