अंडाल थर्मल पावर प्लांट में फिर श्रमिकों का प्रदर्शन, 42 स्थानीय युवकों का रोजगार छिनने का आरोप! INTUC को ज्ञापन देने से रोकने का आरोप BMS पर
शिल्पांचल टुडे, अंडाल ।
पश्चिम बंगाल के अंडाल थर्मल पावर प्लांट में एक बार फिर श्रमिक असंतोष सामने आया है। करीब 42 स्थानीय युवकों का काम बंद किए जाने के विरोध में रविवार को प्लांट परिसर के बाहर तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। आरोप है कि पिछले चार महीनों से अंडाल गांव के ये युवक बेरोजगार बैठे हैं हैं। उनके रोजगार की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपने पहुंचे कांग्रेस समर्थित श्रमिक संगठन INTUC को कथित तौर पर भाजपा समर्थित श्रमिक संगठन BMS के विरोध का सामना करना पड़ा।
चार महीने से बेरोजगार हैं 42 स्थानीय युवक
जानकारी के अनुसार, अंडाल गांव के करीब 40 से 42 युवक लंबे समय से थर्मल पावर प्लांट में ठेका श्रमिक के रूप में काम कर रहे थे। उनका आरोप है कि करीब चार महीने पहले बिना किसी पूर्व सूचना के उनका काम बंद कर दिया गया। इसके बाद से वे लगातार काम पर वापस बुलाए जाने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है।
ज्ञापन देने पहुंचे INTUC को रोकने का आरोप
श्रमिकों की समस्या और रोजगार बहाली की मांग को लेकर रविवार को INTUC की ओर से ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम रखा गया था। संगठन का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से प्लांट प्रबंधन के सामने श्रमिकों की समस्याएं रखना चाहते थे।
लेकिन INTUC का आरोप है कि थर्मल पावर प्लांट के गेट के सामने BMS के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका रास्ता रोक दिया। इसको लेकर दोनों श्रमिक संगठनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया।
घटना की सूचना मिलने पर अंडाल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि, INTUC के कार्यकर्ताओं को बिना ज्ञापन सौंपे ही वापस लौटना पड़ा।
स्थानीय रोजगार पर सवाल, श्रमिक संगठनों के बीच टकराव!
इस घटना के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर चार महीने से 42 स्थानीय युवक बेरोजगार क्यों हैं? उनका काम किस वजह से बंद किया गया? क्या स्थानीय युवकों की जगह दूसरे श्रमिकों को काम दिया जा रहा है?
फिलहाल इस पूरे मामले में थर्मल पावर प्लांट प्रबंधन और BMS की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि चार महीने से रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे 42 स्थानीय युवकों को आखिर कब मिलेगा उनका काम वापस?













