हिंदी साहित्य के महान लेखक और उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई गई
आसनसोल । हिंदी साहित्य के महान लेखक और
उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद की आज 145 वीं जयंती है। उनकी गिनती हिंदी और उर्दू के महानतम लेखकों में की जाती है। देश और दुनिया में जब-जब हिंदी साहित्य की बात होगी तो जहन में सबसे पहला नाम मुंशी प्रेमचंद का आएगा। उन्होंने अपने उपन्यास से न सिर्फ समाज को जागरूक करने का काम किया बल्कि अपने लेखन से हिंदी भाषा को भी नई दिशा दी।आसनसोल नगर निगम और हिंदी अकादमी की तरफ से गुरुवार को कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई गई।
प्रेमचंद जयंती के अवसर पर आसनसोल नगर निगम के मुख्य द्वार पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इस मौके पर आसनसोल नगर निगम के चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी, एमएमआईसी गुरदास चटर्जी, आसनसोल नगर निगम के हिंदी अकादमी के वाइस चेयरमैन दिव्येंदु भगत, सचिव भोला कुमार हेला, संयोजक दिनेश पांडेय, मनोज यादव, पवन गुटगुटिया, मनोहर भाई पटेल, श्रृंजय मिश्रा, नवीन चंद्र सिंह, आरके श्रीवास्तव, निगम के कल्लोल राय, प्रबाल बोस सहित शहर के तमाम साहित्यकार आसनसोल नगर निगम के अधिकारी और अन्य विशिष्ट व्यक्ति उपस्थित थे। यहां पर सभी ने मुंशी प्रेमचंद की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी ने कहा की मुंशी प्रेमचंद एक ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज की कुरीतियों को उजागर किया। उन्होंने दबे कुचले और वंचित वर्ग की कठिनाइयों को अपनी लेखनी के माध्यम से सबके सामने प्रस्तुत किया और तत्कालीन भारतीय समाज के तथाकथित ठेकेदारों से कुछ बेहद कठिन सवाल पूछे। अपनी लेखनी से उन्होंने समाज के उस अंधकार पहलू को सबके सामने उजागर किया जिसे सब देखकर भी अनदेखा करने की कोशिश कर रहे थे।

