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खेल को धर्म और पैसे का अखाड़ा मत बनाइए: सनातन का संदेश है – सर्वे भवन्तु सुखिनः

आसनसोल । सनातन धर्म के मूल्यों और आज के खेल जगत की दिशा पर चिंता जताते हुए आसनसोल के विशिष्ट व्यवसायी सुरेन जालान ने कहा है कि सदियों से सनातन को मिटाने की चेष्टा करने वाले आज भी सक्रिय हैं। कुछ लोग खुद को सेक्युलर बताते हैं, पर उनके कार्यों से सनातन संस्कृति को नुकसान पहुंच रहा है।

उन्होंने कहा कि शायद उन्हें यह नहीं मालूम कि सनातन पद्धति का मूल मंत्र ही है –
“सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्।।”
अर्थात सभी सुखी हों, सभी निरोग रहें, सभी का कल्याण हो और कोई भी दुखी न हो।

खेल के मैदान भी बंटवारे की भेंट चढ़े
उन्होंने फीफा वर्ल्ड कप का उदाहरण देते हुए कहा कि आज खेल के मैदान में भी इसराइल-फिलिस्तीन के रूप में पूरी दुनिया को अर्जेंटीना-स्पेन जैसे दो खेमों में बांटकर देखा जा रहा है। यह पूरी मानवता के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।

सनातन के अनुसार खेल एक स्वस्थ प्रतियोगिता और संस्कार था। लेकिन आज खेल “पैसे का खेल” बन गया है, जो अत्यंत निंदनीय है।

ICC 2027 और भारत-पाक मैच पर सवाल
2027 के ICC वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान के बीच मैचों की संख्या बढ़ाए जाने की संभावना पर उन्होंने कहा कि इसके पीछे केवल एक कारण है – विज्ञापनदाताओं की आमदनी। क्योंकि क्रिकेट में आज भी सबसे ज्यादा राजस्व भारत-पाकिस्तान मैच से ही आता है। खेल को TRP और पैसे के तराजू पर तौलना गलत है।

खेल आयोजकों से अपील
उन्होंने विश्व के सभी खेल आयोजकों और पदाधिकारियों से आग्रह किया कि खेल को खेल ही रहने दें। इसे धर्म और पैसे से न जोड़ें।

“हमारे सनातन में ‘कल के लिए’ नहीं, ‘सबके लिए’ सोचने का प्रावधान है। विश्व को इसी सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।”

 

  

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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