किताबों से आगे जीवन का पाठ पढ़ाते हैं गुरु, राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका सबसे अहम
शिक्षक दिवस विशेष
अकाश सिंह
आसनसोल । आज देशभर में शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन केवल शिक्षकों को शुभकामनाएं देने या स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित करने का अवसर नहीं है, बल्कि उस व्यक्ति के योगदान को याद करने का दिन है जो एक विद्यार्थी के भविष्य को दिशा देता है और समाज की अगली पीढ़ी तैयार करता है।
भारत में हर वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन देश के महान शिक्षाविद्, दार्शनिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर शिक्षकों को समर्पित है।
शिक्षक की भूमिका बदली, जिम्मेदारी और बढ़ी
आज शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। डिजिटल क्लासरूम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑनलाइन शिक्षा और नई तकनीकों ने पढ़ाई के तरीके को बदल दिया है। ऐसे समय में शिक्षक की भूमिका सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं रह सकती।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी शिक्षक दिवस के संदेश में शिक्षकों से लगातार अपना ज्ञान बढ़ाने, तकनीक अपनाने और नई शिक्षण पद्धतियों को स्वीकार करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों में स्वतंत्र सोच और जिज्ञासा विकसित करने पर जोर दिया।
अच्छे अंक से ज्यादा जरूरी है अच्छा इंसान बनना
एक विद्यार्थी के जीवन में शिक्षक का प्रभाव परीक्षा के परिणाम से कहीं आगे तक जाता है। शिक्षक बच्चे को अनुशासन, जिम्मेदारी, मेहनत, ईमानदारी और सही-गलत के बीच अंतर समझाता है।
यही वजह है कि शिक्षक को केवल ‘ज्ञान देने वाला’ नहीं, बल्कि मार्गदर्शक, प्रेरक और चरित्र निर्माता माना जाता है। राष्ट्रपति के संदेश में भी इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षकों का दायित्व विद्यार्थियों को अच्छा इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनने में मदद करना है।
आज के दौर में सबसे बड़ी चुनौती
सोशल मीडिया और इंटरनेट ने विद्यार्थियों के सामने ज्ञान के अनगिनत स्रोत खोल दिए हैं। लेकिन जानकारी और सही ज्ञान में अंतर है। इंटरनेट बहुत कुछ बता सकता है, मगर क्या सही है और क्या गलत—यह समझने की क्षमता विकसित करने में शिक्षक की भूमिका आज भी महत्वपूर्ण है।
इसलिए आने वाले समय में शिक्षक को तकनीक से प्रतिस्पर्धा करने की जरूरत नहीं, बल्कि तकनीक को शिक्षा का मजबूत माध्यम बनाने की जरूरत है।
राष्ट्र निर्माण की पहली पाठशाला
आज के विद्यार्थी ही कल के डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षक, सैनिक, अधिकारी, उद्यमी और जनप्रतिनिधि बनेंगे। इसलिए एक शिक्षक जिस सोच और मूल्यों के साथ विद्यार्थी को तैयार करता है, उसका प्रभाव आने वाले दशकों तक समाज और देश पर दिखाई देता है।
इसीलिए शिक्षक दिवस वास्तव में राष्ट्र निर्माण के उन अनगिनत शिल्पकारों को सम्मान देने का दिन है, जो बिना किसी शोर के देश का भविष्य तैयार कर रहे हैं।
विशेष संदेश
“इमारतें ईंटों से बनती हैं, लेकिन राष्ट्र चरित्रवान नागरिकों से बनता है—और चरित्र निर्माण की पहली जिम्मेदारी एक सच्चे शिक्षक की होती है।”
शिक्षा के इस पवित्र कार्य से जुड़े देश के सभी शिक्षकों को शिल्पाचल टुडे की ओर से शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।














