अनंत चतुर्दशी पर विष्णु जी के अनंत स्वरूप की पूजा, 14 गांठ वाले अनंत सूत्र का है विशेष महत्व – जानिए व्रत विधि
शिल्पांचल टुडे, आसनसोल।
अनंत चतुर्दशी: महत्व, व्रत एवं पूजन का धार्मिक मार्गदर्शन
हिन्दू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी (जिसे अरण या अनंत चौदस भी कहा जाता है) के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व सनातन संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण माना जाता है। इस दिन मुख्य रूप से जगत के पालनहार भगवान विष्णु के ‘अनंत’ स्वरूप की पूजा की जाती है और साथ ही दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन व गणपति विसर्जन भी होता है। उक्त बात की जानकारी पंडित हेमंत मिश्रा ज्योतिषविद (MAJY) ने दी। उन्होंने जानकारी दी
धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व
भगवान विष्णु की आराधना: इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूपों का ध्यान कर उनकी उपासना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजन करने से जीवन के समस्त संकटों और पापों से मुक्ति मिलती है।
अनंत सूत्र (डोरा) का धारण: इस पर्व का सबसे बड़ा आकर्षण चौदह गांठों वाला ‘अनंत सूत्र’ है। सूती या रेशमी धागे को हल्दी-कुमकुम से रंगकर उसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं, जो चौदह लोकों (सात ऊर्ध्व और सात अधोलोक) का प्रतीक हैं। यह सूत्र हमारी रक्षा और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
गणेश विसर्जन: यह पावन तिथि विघ्नहर्ता भगवान गणेश को ससम्मान विदाई देने का भी दिन है, जो हमें यह संदेश देता है कि संसार में हर आरंभ का अंत और हर अंत का नया आरंभ तय है।
व्रत एवं पूजन की सरल विधि
संकल्प और स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थापना: घर के मंदिर या ईशान कोण में चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु (लक्ष्मीनारायण) की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
अनंत सूत्र की पूजा: भगवान के समक्ष 14 गांठों वाला अनंत सूत्र रखें। षोडशोपचार विधि से भगवान विष्णु के साथ इस सूत्र की भी पूजा करें।
मंत्र जाप: पूजन के दौरान इस मंत्र का उच्चारण करें:
अनंत संसार महासमुद्रे मग्नं समभ्युद्धर वासुदेव। अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्यनंतसूत्राय नमो नमस्ते॥
सूत्र धारण: पूजा के पश्चात पुरुष अपने दाहिने हाथ में और महिलाएं अपने बाएं हाथ में इस अनंत सूत्र को बांधें।
इस पावन व्रत को करने से जीवन में धैर्य, संयम और सकारात्मकता का संचार होता है तथा श्रीहरि की कृपा से अनंत सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
