पितृ पक्ष से शरद पूर्णिमा तक – जानिए आश्विन महीने का धार्मिक महत्व
शिल्पांचल टुडे, आसनसोल।
आश्विन (जिसे आम बोलचाल में कुआर या क्वार भी कहा जाता है) हिंदू कैलेंडर का सातवां महीना है, जो कि कार्तिक महीने से ठीक पहले आता है।
आश्विन महीने का धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से बहुत बड़ा महत्व है। इस संबंध में पंडित हेमंत मिश्रा ज्योतिषविद MAJY ने दी जानकारी।
आइए इसके बारे में मुख्य बातें जानते हैं:
1. मौसम और समय
यह वह समय होता है जब भारत में वर्षा ऋतु समाप्त हो रही होती है और ठंड की हल्की शुरुआत (शरद ऋतु) हो रही होती है। इसे बहुत ही सुहावना और पवित्र महीना माना जाता है।
2. इस महीने के प्रमुख त्योहार और पर्व
आश्विन महीना अपने बड़े और प्रसिद्ध त्योहारों के लिए जाना जाता है:
पितृ पक्ष (श्राद्ध): आश्विन महीने की शुरुआत आमतौर पर पितृ पक्ष से होती है, जिसमें लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनका पिंडदान व तर्पण करते हैं। (यह आश्विन कृष्ण पक्ष में आता है)।
शारदीय नवरात्र: आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) से महा नवरात्र की शुरुआत होती है, जिसमें नौ दिनों तक माँ दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है।
दुर्गा पूजा और विजयादशमी (दशहरा): आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा या विजयादशमी का पावन पर्व मनाया जाता है, जो असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है।
शरद पूर्णिमा: आश्विन महीने की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं, जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है।
3. कानूनी और अदालती दृष्टिकोण से महत्व
इस महीने में देश भर की अदालतों में दुर्गा पूजा / दशहरा का लंबा अवकाश (Vacation) होता है, जिससे वकीलों और जजों को कुछ दिनों का विश्राम मिलता है।
