आसनसोल । सर आशुतोष मुखर्जी की जयंती के अवसर पर रविवार आसनसोल नगर निगम के आशुतोष हाल में उनके विशाल तस्वीर पर माल्यार्पण किया गया। इस मौके पर यहां आसनसोल नगर निगम के चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी, निगम के कार्यपालक वीरेन अधिकारी, पार्षद मीना हांसदा तथा अन्य कर्मचारी उपस्थित थे। सभी ने कर आशुतोष मुखर्जी की तस्वीर पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। इस वाक्य पर अमरनाथ चटर्जी ने कहा कि सर आशुतोष मुखर्जी हम सबके लिए प्रेरणा के स्रोत हैं, उन्होंने अंग्रेजों के जमाने में भी अपना सर झुकाने नहीं दिया। उन्होंने हमेशा भारतीय होने पर गर्व किया और यही उनकी सबसे बड़ी पहचान है, उन्होंने सीनेट का सदस्य होने के लिए अंग्रेज सरकार को चिट्ठी लिखी और कहां की अंग्रेजी प्रशासन ने उन्हें सेनेट का सदस्य होने के लिए जो प्रस्ताव दिया है। उसे पर वह तभी सकारात्मक उत्तर दे सकते हैं जब उनका वेतन अंग्रेज अधिकारी के बराबर होगा। उन्होंने कहा कि आशुतोष मुखर्जी ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई वह कलकत्ता यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर हुए भारत सरकार में विचारक के जिम्मेदारी संभाली। लेकिन इन सबसे भी बड़ी बात जो सर आशुतोष मुखर्जी के बारे में कहीं जा सकती है कि शिक्षा ने उनके अंदर वह आत्मविश्वास जगाया जिससे कि उन्हें हम सब बंगाल के टाइगर के नाम से जानते हैं। अगर महानता में सर्वोच्च कोटि का चरित्र और बुद्धि शामिल है और किसी के विचारों और कार्यों के स्थायी मूल्य से इसका मूल्यांकन किया जाना है, तो आशुतोष मुखर्जी निस्संदेह सबसे उत्कृष्ट व्यक्तियों में से एक थे। उनका जीवन एक के बाद एक महत्वपूर्ण उपलब्धियों की कहानी है। आशुतोष मुखर्जी का जन्म 29 जून, 1864 को हुआ था। वे गणित के एक विलक्षण विद्वान थे। उनके गणितीय शोध-पत्र जिनमें से कुछ उन्होंने स्कूल में रहते हुए लिखे थे। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। यह कहना कि वे एक प्रतिभाशाली व्यक्ति थे, संयम की ओर जाने वाली गलती होगी।