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पांडवेश्वर में तृणमूल कांग्रेस का रिकॉर्ड तोड़ जुलूस

पांडवेश्वर । पांडवेश्वर में शुभेंदु अधिकारी के सभा के जवाब में बुधवार तृणमूल कांग्रेस की ओर से विशाल जुलूस निकाला गया और सभा की गई। तृणमूल कांग्रेस के युवा नेता देवांशु भट्टाचार्य ने जनसभा को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा की बंगाल इकाई के ज्यादातर नेता टीएमसी या मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से आए हैं और बंगाल में भाजपा का कोई मूल नेतृत्व नहीं है। उन्होंने कहा कि अयोध्या की जनता ने बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा को इसलिए नकार दिया क्योंकि भगवान राम के नाम पर राजनीति उन्हें स्वीकार नहीं। उन्होंने भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने उन्हें ऊंचाइयों तक पहुंचाया, लेकिन वे अब उनके खिलाफ काम कर रहे हैं। देवांशु भट्टाचार्य ने भारतीय जनता पार्टी पर धर्म के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हम सब का धर्म अपना-अपना हो सकता है। लेकिन जब हम राजनीति के परिसर में प्रवेश करते हैं तो हमें सबको साथ में लेकर चलना होता है। लेकिन भाजपा ऐसा नहीं मानती। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि जिस फैजाबाद लोकसभा के अंतर्गत अयोध्या आता है। वहां की जनता ने भाजपा को बीते लोकसभा चुनाव में नकार दिया था। उसकी वजह यह थी की मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम को यह पसंद नहीं आया कि उनके नाम पर राजनीति की जाए। उन्होंने कहा कि भगवान की पूजा मंदिरों में होती है। राजनीतिक मंच पर नहीं। देवांशु भट्टाचार्य ने कहा कि सबका अपना व्यक्तिगत परिचय होता है। लेकिन जब कोई राजनीति में प्रवेश करता है तो उसे सबके लिए काम करना पड़ता है। वह सिर्फ एक वर्ग विशेष के लिए काम नहीं कर सकता। लेकिन यह बात शुभेंदु अधिकारी जैसे लोग नहीं समझते उन्होंने कहा कि यह वही शुभेंदु अधिकारी हैं जिनको ममता बनर्जी ने फर्श से लेकर अर्श तक पहुंचा था। लेकिन वह आज ममता बनर्जी का एहसान नहीं मानते अमित शाह ने खुद उन्हें भाजपा में शामिल कराया था। वह इसलिए क्योंकि अमित शाह को लगा था कि ममता बनर्जी के सामने शुभेंदु अधिकारी का वह कदर हुआ है कि उन्हें भाजपा में शामिल करने के लिए देश के गृहमंत्री को आना होगा ।
देवांशु भट्टाचार्य ने कहा कि असम में एनआरसी को लेकर उन्होंने कहा कि भाजपा हिंदू हिंदू भाई-भाई का नारा बुलंद करती है। असम के हिंदू लोगों ने भी यही सोचा था और भाजपा को वोट दिया था लेकिन वहां पर भाजपा की सरकार बनने के बाद एनआरसी लागू किया गया। भारत में पहली बार असम में है एनआरसी लागू किया गया था। एनआरसी लागू करने के बाद 17 लाख लोगों की नागरिकता रद्द हो गई जिनमें से 12 लाख बंगाली हिंदू थे। इसलिए अभी भी समय है भाजपा जैसी पार्टी से अपने आप को दूर रखने की आवश्यकता है वरना यहां पर भी कुछ उसी तरह की स्थिति बन सकती है। वहीं मंच पर दर्जनों भाजपा कर्मी भाजपा छोड़कर तृणमूल का झंडा थामकर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुआ।

 

 

 

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