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त्रिवेणीदेवी भालोटिया कॉलेज में जियोस्पेशियल साइंस और ड्रोन तकनीक पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित

आसनसोल । त्रिवेणीदेवी भालोटिया कॉलेज के भूगोल विभाग द्वारा 18 एवं 19 फरवरी 2026 को “एडवांस्ड जियोस्पेशियल साइंस और ड्रोन-बेस्ड रिमोट सेंसिंग” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्राचार्य डॉ संजीव पांडेय के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. सुमा दां ने किया, जबकि डॉ. सरबेंदु विकास संयोजक के रूप में जुड़े रहे। विभाग के सभी सदस्यों के सहयोग से कार्यशाला सफलतापूर्वक आयोजित की गई। ड्रोन और रिमोट सेंसिंग के प्रसिद्ध विशेषज्ञ अयन घोष(जीटीएस ) के निदेशक, ने विद्यार्थियों को ड्रोन संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया तथा उन्नत सॉफ्टवेयर के माध्यम से डिजिटल एलिवेशन मॉडल तैयार करने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। यह कार्यशाला संवादात्मक एवं ज्ञानवर्धक रही, जिसमें स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। अन्य महाविद्यालयों के संकाय सदस्य भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।
चीफ गेस्ट डॉ. कुंतल कांति चट्टराज, हेड ऑफ डिपार्टमेंट ऑफ जियोग्राफी, काजी नजरूल यूनिवर्सिटी ने आगे बताया कि जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी – जिसमें जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस), रिमोट सेंसिंग, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) और स्पेशल डेटा एनालिटिक्स शामिल हैं – रिसर्च, गवर्नेंस और इंडस्ट्री में ज़रूरी टूल बन गए हैं। ये टेक्नोलॉजी रियल-टाइम मैपिंग, एनवायरनमेंटल मॉनिटरिंग और सबूतों के आधार पर फैसले लेने में मदद करती हैं, जिससे एग्रीकल्चर और अर्बन डेवलपमेंट से लेकर डिजास्टर मैनेजमेंट और पब्लिक हेल्थ जैसे सेक्टर को फायदा होता है।
अपने संबोधन में प्राचार्य डॉ. पांडे ने शैक्षणिक अनुसंधान में ड्रोन मैपिंग तकनीक की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला और भूगोल सहित अन्य विज्ञान विषयों में इसकी बढ़ती महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी आधुनिक तकनीकें भविष्य के शोधार्थियों के बीच महत्वपूर्ण अनुसंधान रुचि विकसित करने में सहायक सिद्ध होंगी।

 

  

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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