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सुरक्षा के पुल, तरक्की के रास्ते: पूर्व रेलवे ने खत्म किए खतरनाक फाटक, 786 ROB-RUB से बदली तस्वीर’

कोलकाता। एक वक्त था जब रेलवे फाटक बंद होते ही सड़क पर जिंदगी थम सी जाती थी। सायरन बजाती एंबुलेंस, स्कूल बस में बैठे मासूम बच्चे, दफ्तर को भागते लोग और किसान सबकी सांसें अटक जाती थीं। तेज धूप हो या मूसलाधार बारिश, घंटों लंबी कतारें, अनिश्चित देरी और हादसों का डर… हर बंद फाटक एक मौन प्रार्थना बन जाता था। लेकिन अब पूर्व रेलवे ने इस डर को इतिहास बना दिया है।

खतरे की जगह बने ‘सुरक्षा के पुल’
पूर्व रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए खतरनाक समपार फाटकों को हमेशा के लिए बंद करने का अभियान छेड़ दिया है। इनकी जगह अब रोड ओवर ब्रिज (ROB) और रोड अंडर ब्रिज (RUB) ने ले ली है। ये सिर्फ कंक्रीट के ढांचे नहीं, बल्कि जिंदगी बचाने वाली ‘जीवनरेखा’ हैं।

अब न ट्रेन रोकनी पड़ती है, न सड़क पर जाम लगता है। ट्रेनें बेरोकटोक दौड़ रही हैं और एंबुलेंस बिना रुके अस्पताल पहुंच रही है। हादसों का खतरा खत्म, समय की बर्बादी खत्म।

महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर के नेतृत्व में आई क्रांति
पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक श्री मिलिंद देऊस्कर के दूरदर्शी नेतृत्व में यह बदलाव पूरे जोन में तेजी से हो रहा है। उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां युद्धस्तर पर ROB-RUB बनाए जा रहे हैं। मकसद साफ है—रेल और सड़क के बीच सुरक्षा का स्थायी पुल बनाना।

आंकड़े जो बयां करते हैं बदलाव की कहानी
अब तक पूर्व रेलवे के चारों मंडलों में कुल *579 रोड अंडर ब्रिज (RUB)* और *207 रोड ओवर ब्रिज (ROB)* या तो बन चुके हैं या अंतिम चरण में हैं।

हावड़ा मंडल सबसे आगे: 244 RUB और 53 ROB बनाकर रिकॉर्ड बनाया।
सियालदह मंडल: शहरी-ग्रामीण कनेक्टिविटी के लिए 119 RUB और 37 ROB तैयार।
मालदा मंडल: 112 RUB और 50 ROB से क्षेत्रीय संपर्क मजबूत किया।
आसनसोल मंडल: 104 RUB और सबसे ज्यादा 67 ROB बनाकर ट्रैफिक जाम को खत्म किया।

‘हर बंद फाटक अब इतिहास बनेगा’: CPRO
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा, “हर ROB और RUB जनता से किया गया वादा है जिसे हम निभा रहे हैं। हम सिर्फ पुल नहीं बना रहे, हम डर को खत्म कर भरोसा बना रहे हैं। महाप्रबंधक के मार्गदर्शन में हमारा लक्ष्य पूरे नेटवर्क को 100% दुर्घटनामुक्त बनाना है। अब कोई बंद फाटक किसी नागरिक और उसकी मंजिल के बीच नहीं आएगा। हर सफर—चाहे रेल का हो या सड़क का सुरक्षित, तेज और सुकूनभरा होगा।”

पूर्व रेलवे का यह अभियान सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बदल रहा, बल्कि लाखों लोगों की जिंदगी से ‘इंतजार’ और ‘डर’ शब्द को हमेशा के लिए मिटा रहा है।

 

  

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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