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बनवारीलाल भलोटिया कॉलेज में 4 दिवसीय ‘श्यामा प्रसाद पक्षकाल’ संपन्न: 125वीं जयंती पर इतिहास, राष्ट्रवाद और शिक्षा पर गहन मंथन

 डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों पर व्याख्यान, वाद-विवाद और कविता पाठ से छात्रों में जगी राष्ट्रीय चेतना

आसनसोल।  ‘भारत केसरी’ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर बनवारीलाल भलोटिया कॉलेज, आसनसोल में आयोजित 4 दिवसीय ‘श्यामा प्रसाद पक्षकाल’ का सफल समापन हुआ। इतिहास और राजनीति विज्ञान विभाग, दोनों शिफ्ट, द्वारा आर.एस. मोर कॉलेज, धनबाद के सहयोग से आयोजित इस शैक्षणिक कार्यक्रम ने छात्रों और शिक्षकों के बीच इतिहास, राष्ट्रनिर्माण और नागरिक कर्तव्य पर सार्थक संवाद की शुरुआत की।

छात्रों के लिए था ये मंच – प्रिंसिपल
कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. अमिताभ बसु के प्रेरणादायक स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसे शैक्षणिक आयोजन सबसे पहले छात्रों के लिए होते हैं। सिर्फ क्लासरूम से ही जागरूक नागरिक नहीं बनते, इसके लिए इतिहास, विचारों और बौद्धिक बहस में भागीदारी जरूरी है। उन्होंने डॉ. मुखर्जी को आधुनिक भारत के राष्ट्र निर्माताओं में से एक बताते हुए राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने में उनके योगदान को याद किया।

विकसित भारत से लेकर कश्मीर तक पर हुए व्याख्यान
4 दिनों तक चले इस कार्यक्रम में कई विचारोत्तेजक व्याख्यान हुए:
1. डॉ. प्रवीण सिंह, प्राचार्य आर.एस. मोर कॉलेज, धनबाद ने “डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और विकसित भारत का विचार” पर बोलते हुए कहा कि विकसित भारत सिर्फ आर्थिक तरक्की से नहीं, बल्कि शिक्षा के पुनर्जागरण, मूल्य आधारित शिक्षा और संस्थागत उत्कृष्टता से बनेगा।

2. डॉ. कौसिक मुखर्जी ने कश्मीर में डॉ. मुखर्जी के अंतिम दिनों का भावनात्मक और साहित्यिक वर्णन किया। उन्होंने उनकी हिरासत और मृत्यु के इर्द-गिर्द हुए अन्याय को उजागर करते हुए उन्हें राष्ट्रीय एकता के लिए शहीद होने वाले महानायक बताया।

3. संतोष भगात ने भारतीय जनसंघ की विचारधारा, संगठन और विरासत के साथ-साथ ‘एकात्म मानववाद’ के दर्शन को समझाया। उन्होंने समाज के लिए एक समग्र दृष्टिकोण पर जोर दिया जहां व्यक्ति, समुदाय, राष्ट्र और प्रकृति एक-दूसरे के पूरक हैं।

4. पवन गुरूंग ने भारतीय राजनीतिक विमर्श में ‘हिंदू’ पहचान के विकास और भारत की बड़ी अवधारणा से उसके संबंध पर दार्शनिक विश्लेषण प्रस्तुत किया।

5. रणजीत मंडल ने “डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और राष्ट्रीय अखंडता का विचार” पर संवैधानिक दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि ‘अखंडता’ शब्द ‘एकता’ से कहीं गहरा है। डॉ. मुखर्जी की नजर में राष्ट्रीय अखंडता सिर्फ भौगोलिक नहीं, बल्कि देश और नागरिकों के बीच भावनात्मक बंधन थी।

छात्रों ने दिखाया उत्साह
व्याख्यानों के बाद छात्रों के लिए एक्सटेम्पोर भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। छात्रों की भागीदारी और तर्कशक्ति ने सभी को प्रभावित किया। प्रतियोगिता का निर्णयन डॉ. लैला मित्रा, प्रो. सुब्रत मंडल और डॉ. विजय प्रसाद ने किया।

कार्यक्रम का कुशल संचालन राजनीति विज्ञान विभाग की डॉ. काकली कुंडू, डे शिफ्ट और प्रो. पियाली बनर्जी, हिंदी शिफ्ट ने किया। पूरे आयोजन में शिक्षकों, गैर-शिक्षक कर्मचारियों और छात्रों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने इसे एक सच्चा शैक्षणिक उत्सव बना दिया।

समापन पर आयोजकों ने कहा कि महान नेताओं को सच्ची श्रद्धांजलि उन्हें याद करने से नहीं, बल्कि उनके विचारों पर गंभीरता से चर्चा कर, संवाद को बढ़ावा देकर और युवाओं को राष्ट्र के भविष्य के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करके ही दी जा सकती है। बनवारीलाल भलोटिया कॉलेज ‘विकसित भारत’ के सपनों को शिक्षा के पुल से जोड़ने के लिए ऐसे मंच बनाता रहेगा।

 

  

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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