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ईएसआई को मेडिकल कॉलेज बनाने का स्वागत, पर नौकरी गई तो क्या करें? संविदा कर्मियों का हंगामा

“15 साल से सेवा दे रहे 150 कर्मियों का भविष्य संकट में, आसनसोल ईएसआई में विरोध प्रदर्शन”

आसनसोल । आसनसोल ईएसआई अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में अपग्रेड किए जाने के फैसले का स्वागत तो हुआ, लेकिन इसी के साथ अस्पताल के संविदा डॉक्टर, नर्स और ग्रुप-डी कर्मचारियों के सामने नौकरी का संकट खड़ा हो गया है।

नौकरी की अनिश्चितता को लेकर सोमवार को अस्पताल के गेट के सामने दर्जनों संविदा कर्मी प्रदर्शन पर बैठ गए।

क्या है कर्मचारियों का आरोप
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पिछले 15 साल से वे अस्पताल में सेवा दे रहे हैं। लेकिन अब मेडिकल कॉलेज शुरू होने के नाम पर मौखिक रूप से नौकरी से हटाने की बात कही जा रही है। यहां तक कि व्हाट्सऐप मैसेज भेजकर सेवा समाप्त करने की आशंका भी जताई जा रही है।

संविदा चिकित्सक डॉ. शर्मिष्ठा सरकार ने कहा, _”हमने 24 घंटे की स्वास्थ्य सेवा संभाली है। कई स्थायी डॉक्टर ड्यूटी के समय निजी क्लीनिक चलाते हैं, फिर भी हटाया हमें जा रहा है। कैंटीन, मरीज रेफरल और कोविड वैक्सीन में हुई अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”_

उन्होंने मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी से मानवीय आधार पर हस्तक्षेप की मांग की।

डॉ. अभिजीत मलाकार ने आरोप लगाया कि पहले कहा गया था कि अस्पताल केंद्र के अधीन जाने पर सभी को समायोजित किया जाएगा। लेकिन अब रुख बदल गया है। _”लगभग 46 संविदा-पार्ट टाइम डॉक्टर और 100 से ज्यादा अन्य कर्मचारियों का भविष्य अंधकार में है। प्रशासनिक नियुक्तियों और निजी प्रैक्टिस की भी जांच हो।”

ग्रुप-डी कर्मचारी रूपेश दुबे ने कहा, _”2017 से काम कर रहे हैं। 15 हजार रुपये में घर चलाना मुश्किल है। अगर दूसरे जिले भेज दिया गया तो परिवार कैसे पलेगा? मेडिकल कॉलेज से पहले हमें यहीं रखने का वादा किया गया था।”_

कर्मचारियों की मांग
1. मेडिकल कॉलेज बनने पर वर्षों से काम कर रहे संविदा कर्मियों को हटाया न जाए
2. सभी का भविष्य सुरक्षित किया जाए
3. अस्पताल में लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो
4. जरूरत पड़ने पर सरकार हस्तक्षेप कर स्थायी समाधान निकाले

अस्पताल प्रशासन का रुख
इस पूरे मामले पर अस्पताल अधीक्षक डॉ. पी. एस. दत्ता ने कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

कर्मचारियों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज का फैसला स्वागतयोग्य है, लेकिन उसकी कीमत 150 परिवारों की रोजी-रोटी से नहीं चुकाई जानी चाहिए।

 

  

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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