पश्चिम बंगाल श्रमिक कल्याण प्राधिकरण की ओर से मई दिवस मनाया गया
आसनसोल । पश्चिम बंगाल श्रमिक कल्याण प्राधिकरण की ओर से सोमवार मई दिवस के अवसर पर आसनसोल के रविंद्र भवन में मजदूर दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर राज्य के कानून तथा श्रम मंत्री मलय घटक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इनके अलावा पश्चिम बर्दवान जिला आईएनटीटीयूसी अध्यक्ष अभिजीत घटक, एडीडीए चेयरमैन सह विधायक तापस बनर्जी, एमएमआईसी गुरुदास चटर्जी, बोरो चेयरमैन अनिमेष दास, राजेश तिवारी, डॉ. देवाशीष सरकार, उत्पल सिन्हा, आसनसोल दुर्गापुर के विभिन्न पार्षद और पश्चिम बंगाल श्रम प्राधिकरण के अन्य आला अधिकारी उपस्थित थे। इसके साथ ही बड़ी संख्या में टीएमसी और उनके विभिन्न संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता भी उपस्थित थे । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य के श्रम तथा कानून मंत्री मलय घटक ने कहा कि 2011 के बाद जब से राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व में सरकार का गठन हुआ है। पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए कई परियोजनाएं लागू की गई हैं। उन्होंने वामपंथी नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह सिर्फ श्रमिकों के हितों की रक्षा की लंबी लंबी बातें करते थे। लेकिन श्रमिकों के हितों की असली रक्षा अगर किसी ने की है तो वह है मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। मलय घटक ने कहा कि पहले 61 ऐसे क्षेत्र थे जिनमें श्रमिकों को न्यूनतम वेतन दिया जाता था और वह भी सिर्फ 2200 रुपए । 2011 में पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन हुआ था। तब श्रमिकों को 2200 रुपए न्यूनतम वेतन दिया जाता था वह भी सिर्फ 61 क्षेत्रों में लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आते ही इसे तीन गुना बढ़ा दिया और आज श्रमिकों को न्यूनतम वेतन 9000 से कुछ ज्यादा रुपए मिलते हैं। इसके साथ ही जो न्यूनतम वेतन पाने का क्षेत्र है उसे 61 से बढ़ाकर 91 किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार पर भी करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार सिर्फ श्रमिक हितों की बड़ी-बड़ी बातें करती है। लेकिन आज श्रमिक हितों को भाजपा सरकार कुचलने पर आमादा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जो 4 श्रम कोड लागू करने की बात कही जा रही है। उसका ममता बनर्जी पहले दिन से विरोध करती आ रही है। यही वजह है कि भारतवर्ष के विभिन्न राज्यों में यह श्रम कोड भले ही लागू हो चुके हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में अभी तक इनको लागू करने नहीं दिया गया है। इन श्रम कोडों के जरिए श्रमिक नेताओं को कुचलने की साजिश रची जा रही है। 8 घंटे काम करने की मांग पर आंदोलन की वजह से जो मई दिवस बना था। इस श्रम कोड में उस 8 घंटे कार्य समय सीमा को बढ़ाकर 12 घंटे करने की बात कही गई है। ठीक वैसे ही और भी कई क्षेत्र हैं जिनमें श्रमिक हितों को पूंजीपतियों के हितों के लिए खत्म करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने साफ कहा की श्रमिक हितों की रक्षा के लिए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी सरकार प्रतिबद्ध है। मलय घटक ने अपने वक्तव्य में वामपंथियों के बारे में कहा कि वह श्रमिक हितैषी नहीं बल्कि वह पूंजीपतियों के हित में श्रमिकों के स्वार्थों को तिलांजलि देते थे। यही वजह है कि 2011 से पहले 22 साल तक वामपंथी शासन काल में न्यूनतम वेतन 1 रुपए भी नहीं बढ़ा। वही ए कैटेगरी और बी कैटिगरी के मुद्दे पर स्पष्टीकरण देते हुए मलय घटक ने कहा कि यह नियम केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया है और यह राज्य सरकार का नियम नहीं है।