बंद खदानें बनेंगी ग्रीन जोन! ECL का मास्टर प्लान, भनौरा OCP में बदलेगी तस्वीर
आसनसोल। कोयला खदान बंद होने के बाद जमीन बंजर हो जाती है, इस धारणा को बदलने के लिए ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) ने एक बड़ी और दूरदर्शी पहल शुरू की है। बंद खदानों की जमीन को अब पर्यावरण के अनुकूल और रोजगारपरक संपत्ति में बदला जाएगा।
इसको लेकर ECL मुख्यालय के संकल्प हॉल में TCCM (Technical Cooperation on To-be-Closed Coal Mines) प्रोजेक्ट के तहत एक हाई-लेवल मीटिंग हुई। यह प्रोजेक्ट कोयला मंत्रालय और GIZ India के सहयोग से चलाया जा रहा है।
कौन-कौन हुआ शामिल?
बैठक में कोयला मंत्रालय, CCO, कोल इंडिया, ECL, CMPDI, जिला प्रशासन और GIZ के सीनियर अधिकारी मौजूद रहे। साथ ही सतग्राम-श्रीपुर क्षेत्र के अधिकारी भी शामिल हुए। बैठक में तय किया गया कि बंद होने वाली खदानों का भविष्य कैसे सुरक्षित और उपयोगी बनाया जाए।
भनौरा OCP का दौरा
मीटिंग के बाद अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने भनौरा OCP (चरनपुर) का फील्ड दौरा किया। टीम ने मौके पर जाकर जमीन की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया और जिला खनन विभाग, ADM DL&LRO के साथ चर्चा की
इस दौरान मुख्य रूप से तीन बातों पर फोकस रहा:
1. पर्यावरणीय पुनर्स्थापन: खदान की जमीन को फिर से हरा-भरा बनाना।
2. भूमि का नया उपयोग: बंद खदान क्षेत्र को सोलर पार्क, इको-टूरिज्म या अन्य उपयोगी प्रोजेक्ट में बदलना।
3. स्थानीय रोजगार: स्थानीय युवाओं के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा करना।
अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक दौरा नहीं, बल्कि जिम्मेदार माइन क्लोजर और खनन क्षेत्रों के वैज्ञानिक पुनर्विकास की दिशा में एक बड़ी शुरुआत है, जिससे आने वाले समय में पूरे इलाके की तस्वीर बदल जाएगी।














