बड़ी खबर: अब बच्चों के प्रदर्शन से बढ़ेगी शिक्षकों की सैलरी! बंगाल सरकार ला रही नया नियम, शिक्षक संगठनों ने जताई आपत्ति
शिल्पांचल टुडे , कोलकाता।
पश्चिम बंगाल की नई सरकार प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। अब प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों की सालाना वेतनवृद्धि (Annual Increment) को विद्यार्थियों के पढ़ाई में प्रदर्शन और सीखने के परिणामों से जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया है।
स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने गुरुवार (29 अक्टूबर) को इस प्रस्ताव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों की जवाबदेही तय करना चाहती है, ताकि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहतर हो सके।
1. बच्चों का रिजल्ट खराब तो शिक्षक से मांगा जाएगा जवाब
मंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी कक्षा में 20 बच्चे हैं और उनमें से 15 बच्चे पढ़ना नहीं सीख पाते हैं, तो संबंधित शिक्षक से इसकी वजह पूछी जाएगी।
सरकार यह जानना चाहती है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई में सुधार क्यों नहीं हुआ और इसके लिए शिक्षक की क्या जिम्मेदारी है।
2. सालाना वेतनवृद्धि पर पड़ सकता है असर
फिलहाल राज्य के प्राथमिक शिक्षकों को जुलाई में बेसिक वेतन का 3 प्रतिशत सालाना इंक्रीमेंट मिलता है।
नए प्रस्ताव के तहत शिक्षकों के प्रदर्शन और विद्यार्थियों की प्रगति को वेतनवृद्धि तथा प्रमोशन से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इसके लिए अभी कोई अंतिम नियम या मूल्यांकन प्रक्रिया घोषित नहीं हुई है।
3. एक कक्षा की जिम्मेदारी एक शिक्षक को!
सरकार प्राथमिक स्कूलों में एक नई व्यवस्था पर भी विचार कर रही है। इसके तहत एक दिन एक शिक्षक पूरी कक्षा की जिम्मेदारी संभाल सकता है और अलग-अलग दिनों में शिक्षक बदल सकते हैं।
मंत्री का मानना है कि इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई की जिम्मेदारी स्पष्ट होगी।
4. 13 हजार नए शिक्षकों की नियुक्ति की तैयारी
शिक्षा मंत्री के मुताबिक, राज्य में लगभग 13 हजार प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति की योजना है।
सरकार का दावा है कि नियुक्तियों के बाद प्राथमिक स्तर पर शिक्षक और विद्यार्थियों का अनुपात मौजूदा 1:26 से घटकर लगभग 1:20 हो सकता है।
5. शिक्षक संगठनों ने उठाए सवाल
इस प्रस्ताव को लेकर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है।
ऑल बंगाल प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन के महासचिव ध्रुव शेखर मंडल ने कहा कि राज्य के कई स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक, कक्षाएं और पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध नहीं है।
उनका सवाल है कि जब लगभग 1.7 लाख शिक्षक 60 हजार से अधिक स्कूलों में 3.3 लाख कक्षाओं की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, तो नई व्यवस्था को लागू करना कितना व्यावहारिक होगा?
जनता की नजर में बड़ा सवाल
क्या विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन को शिक्षकों की वेतनवृद्धि से जोड़ने से सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार आएगा? या पहले स्कूलों में शिक्षकों की कमी, बुनियादी सुविधाओं और पढ़ाई के संसाधनों को बेहतर बनाने की जरूरत है?
फिलहाल यह सरकार का प्रस्ताव है, अंतिम लागू नियम नहीं।














