बंगाल की स्कूली किताबों में बदलाव की तैयारी, ‘अब्बा’ की जगह ‘बाबा’, ‘पानी’ की जगह ‘जल’
आकाश सिंह
शिल्पांचल टुडे, कोलकाता।
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब शिक्षा व्यवस्था और स्कूली पाठ्यक्रम में बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार की ओर से गठित पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तक समीक्षा समिति ने राज्य के सरकारी स्कूलों की किताबों में कई महत्वपूर्ण बदलावों की सिफारिश की है।
1. बांग्ला की किताबों में बदलेंगे शब्द
समिति के अध्यक्ष एवं कल्याणी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर देबाशीष चटर्जी के अनुसार, बांग्ला भाषा की किताबों में कुछ शब्दों को बदलने का प्रस्ताव है।
प्रस्तावित बदलाव:
पानी की जगह जल।
अब्बा की जगह बाबा।
अम्मी की जगह मां।
किताब की जगह पुस्तक।
आसमान की जगह आकाश।
दोस्त की जगह मित्र।
गोसोल की जगह स्नान।
समिति का तर्क है कि इनकी जगह बांग्ला में रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक शब्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
2. मुगल इतिहास और मार्क्सवाद के कुछ हिस्से होंगे कम
इतिहास की किताबों में मुगल शासन, ब्रिटिश औपनिवेशिक इतिहास और मार्क्सवादी विचारधारा से जुड़े कुछ हिस्सों को कम करने की सिफारिश की गई है।
3. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को मिलेगी जगह
नई पाठ्यपुस्तकों में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और योगदान को शामिल करने का प्रस्ताव है। समिति चाहती है कि विद्यार्थियों को उनके बारे में जानकारी दी जाए।
4. रवींद्रनाथ टैगोर की कविता में भी बदलाव
साहित्य के पाठ्यक्रम में:
टैगोर की कविता ‘शिवाजी उत्सव’ को शामिल करने की सिफारिश।
द्विजेंद्रलाल राय के नाटक ‘मेवाड़ पतन’ को जगह देने का प्रस्ताव।
‘अफ्रीका’ कविता को हटाने की सिफारिश।
सिराजुद्दौला पर आधारित नाटक को हटाने का प्रस्ताव।
5. सिंगूर आंदोलन और कन्याश्री योजना के अध्याय हटाने की सिफारिश
ममता बनर्जी सरकार के समय पाठ्यक्रम में शामिल किए गए सिंगूर भूमि आंदोलन और कन्याश्री योजना से जुड़े अध्यायों को हटाने का भी प्रस्ताव है।
6. सिनौली और राखीगढ़ी की पुरातात्विक खोजों को मिलेगी जगह
इतिहास की किताबों में उत्तर प्रदेश के सिनौली और हरियाणा के राखीगढ़ी में हुई पुरातात्विक खुदाई से जुड़ी जानकारियां शामिल करने की सिफारिश की गई है। इन खोजों को आर्यों के भारत आगमन से संबंधित प्रचलित सिद्धांतों के संदर्भ में पढ़ाने की बात कही गई है।
7. कब से लागू हो सकते हैं बदलाव?
समिति नई किताबों का पहला संस्करण जनवरी 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। समिति के अध्यक्ष के मुताबिक, 15 दिनों के भीतर विस्तृत सिफारिशें सरकार को सौंपी जानी हैं।
सरकार की अंतिम मंजूरी के बाद ही इन बदलावों के लागू होने की स्थिति स्पष्ट होगी।
