जमीन हमारी, नौकरी बाहरी लोगों को क्यों? रानीगंज में रश्मि ग्रुप के खिलाफ फूटा युवाओं का गुस्सा, 100 से ज्यादा जमीनदाताओं ने घेरा प्रबंधन
शिल्पांचल टुडे, रानीगंज।
रानीगंज के तिराट, क्वारडी और चेलोद इलाके में अब गुस्सा उबाल पर है। रश्मि ग्रुप के खिलाफ स्थानीय बेरोजगार युवाओं और जमीन देने वाले परिवारों ने मोर्चा खोल दिया है।
गुरुवार को 100 से अधिक युवाओं और जमीनदाता परिवारों ने कंपनी के GM / AGM को सामूहिक ज्ञापन* सौंपकर साफ कहा – पहले स्थानीय को नौकरी दो, फिर बाहरी को।
2025 की जनसुनवाई में क्या वादा हुआ था?
ग्रामीणों का आरोप है कि 2025 में रश्मि ग्रुप की परियोजना की जनसुनवाई के दौरान कंपनी और प्रशासन के सामने दो बड़े आश्वासन दिए गए थे –
1. तिराट, क्वारडी और चेलोद के स्थानीय बेरोजगार युवाओं को स्थायी और अस्थायी रोजगार दिया जाएगा।
2. जिन परिवारों ने अपनी कृषि भूमि दी है, उन जमीनदाता परिवारों को नौकरी में प्राथमिकता मिलेगी।
इसी भरोसे पर ग्रामीणों ने कंपनी को अपनी जमीन पर काम करने की अनुमति दी थी।
अब आरोप – बाहरी एजेंसियों से करा रहे काम
ग्रामीणों का कहना है कि अब कंपनी में निर्माण और अन्य काम चल रहा है, लेकिन स्थानीय युवाओं को छोड़कर बाहरी एजेंसियों के जरिए दूसरे क्षेत्रों से मजदूर-कर्मचारी बुलाए जा रहे हैं।
युवाओं का सवाल है – जब जमीन हमारी गई, परियोजना हमारे गांव में है, तो रोजगार का पहला हक भी हमारा क्यों नहीं?
जमीनदाता युवक का दर्द
एक जमीनदाता परिवार के युवक ने कहा – “हमने अपनी पुश्तैनी खेती की जमीन दी थी। भरोसा दिलाया गया था कि हमारे घर के लोगों को काम मिलेगा। आज हमारे गांव के युवक बेरोजगार घूम रहे हैं और बाहर के लोगों को काम दिया जा रहा है। इसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
बड़े आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन में मांग की गई है कि 2025 की जनसुनवाई के आश्वासन को तुरंत पूरा किया जाए। युवाओं ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
अब सबकी नजर रश्मि ग्रुप के प्रबंधन पर है। क्या कंपनी अपना वादा निभाएगी, या तिराट-क्वारडी-चेलोद का ये विरोध आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन में बदल जाएगा?













