आसनसोल(परितोष सन्याल)। कोरोना महामारी के झटके से उबरकर यात्रा उद्योग फिर से उठ खड़ा हुआ है। पिछले कुछ सालों में औद्योगिक क्षेत्र में यात्रा पाला आयोजन का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। कलाकारों से लेकर उत्पादकों और बुकिंग एजेंटों के चेहरों पर मुस्कान बिखरी है। उनका मानना है कि इस रथ यात्रा में भी बाजार में सकारात्मकता रहेगी। रथ यात्रा का दिन यात्रा उद्योग का प्रतीक माना जाता है। इस दिन से ही नए यात्रा पाला आयोजन की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। हर बुकिंग काउंटर पर चहल-पहल शुरू हो जाती है। जितनी बुकिंग, उतनी ही ज्यादा यात्राएं। मुनाफे का भंडार भर जाता है। इसलिए रानीगंज के रानीसायर के बुकिंग ऑफिस सज गए हैं। रानीसायर में हर यात्रा समूह का बुकिंग ऑफिस है। वहां अधिकृत एजेंट हैं। वे तय कमीशन पर ऑफिस चलाते हैं। दक्षिण बंगाल के चार जिले- पश्चिम बर्दवान, बांकुड़ा, बीरभूम, पुरुलिया के साथ ही झारखंड की सीमा से लगे बंगाली बहुल इलाके भी अभी यात्रा के लिए लोकप्रिय हैं। ये बुकिंग एजेंट इन दफ्तरों से यात्रा पाला के लिए टिकट बुक करते हैं। एजेंटों के मुताबिक, इंडस्ट्रियल एरिया में 50 के दशक से बुकिंग का काम चल रहा है। खास तौर पर रथयात्रा के दिन एजेंटों को सांस लेने की भी फुर्सत नहीं होती। समूह की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वे कितने टिकट जमा कर पाते हैं। भक्ति महतो पिछले 40 सालों से बुकिंग एजेंट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे कहते हैं, ’90 के दशक तक यात्रा में तेजी थी, उसके बाद गिरावट आ गई। कोरोना काल में स्थिति काफी खराब हो गई। अब धीरे-धीरे ही सही, तस्वीर बदली है।’ उन्होंने कहा, ‘तीन साल से जात्रा उद्योग की स्थिति में सुधार हुआ है। पिछली बार करीब 350 टिकट बुक हुए थे। उम्मीद है कि इस बार भी कारोबार में तेजी आएगी। लेकिन सब कुछ बजट पर निर्भर करता है।’ एक अन्य बुकिंग एजेंट बिपट्टरण माजी की भी यही राय है। उन्होंने कहा, ‘पिछले साल हमने करीब चार सौ यात्रा पाला बुक किए थे। उम्मीद है कि इस बार भी अच्छा होगा। साल के अंत में चुनाव की घंटी बजेगी। उससे पहले बाजार अच्छा रहा तो सबको फायदा होगा।’ सभी इस बात पर सहमत हैं कि यात्रा में दर्शकों की रुचि फिर से बढ़ी है। यही बात उन्हें उम्मीद देती है। यात्रा निर्माता अजीत चक्रवर्ती ने उम्मीद जताई है। पिछले तीन वर्षों से वे एक समूह के संरक्षक हैं। इस बार वे 50 कलाकारों के साथ एक नया यात्रा पाला मंचन करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘पिछले साल हमने इस खनन क्षेत्र में करीब 70 यात्रा पाला मंचन किए थे। इस बार संख्या और भी बढ़ेगी।’ उनका दावा है कि 70 के दशक में खनन क्षेत्र में यात्रा कला का जो महत्व था, वह वापस आ गया है। मालूम हो कि राज्य में इस समय करीब 200 समूह हैं। इनमें से 50 कोलकाता से हैं। अधिकांश समूह मिदनापुर से हैं। कुल मिलाकर औद्योगिक क्षेत्र का आवागमन वास्तव में मजबूत है।