यदुवंश में श्रीकृष्ण का जन्म पाखंड अंधविश्वास जुल्म अन्याय और अत्याचार समाप्त करने के लिए हुआ था – नन्द बिहारी यादव
यदुवंश के यदुकुल शिरोमणि और यादवेंद्र थे श्रीकृष्ण
आसनसोल । आसनसोल-शिल्पांचल के जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता एवं समाजवादी राजद नेता “भगवान श्रीकृष्ण लोक सांस्कृतिक समाज” के संस्थापक एवं संरक्षक नंद बिहारी यादव ने जन्माष्टमी के अवसर पर समस्त देशवासियों को भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का आज से 5000 वर्ष पूर्व पौराणिक ग्रंथ के अनुसार यादव कुल में विपरीत परिस्थितियों में हुआ था। जब इस धरती पर अधर्म अत्याचार और जुल्म अन्याय और पाप की सारी सीमाएं प्रकाष्ठा के ऊपर बह रही थी। इसी क्रम में प्रकृति ने यदुवंश जो संसार का सबसे पवित्र मानवता का मानव जीवन में एक ऐसा कुल खानदान और वंश था जिसके रग रग में न्याय सत्य और प्रकृति की रक्षा करने का जज्बा था। इसी में परमपिता परमेश्वर संसार को चलाने वाले ने जन्म लेकर इस धरती से पाखंड अंधविश्वास अन्याय और जुल्म को पूरी तरह से समाप्त कर मानव धर्म की रक्षा किया।
उल्लेखनीय की भगवान श्री कृष्ण का जन्म वासुदेव एवं देवकी यादव गणतंत्र के मथुरा के युवराज कंस की बहन और बहनोई थे। उनके यहां हुआ और उनका पालन पोषण यदुवंशी बाबा नंद के यहां गोकुल नंद गांव में हुआ। श्रीकृष्णा जब 10 वर्ष की उम्र के हुए। इस वक्त इस धरती से मनुवादियों का जो पाखंड अंधविश्वास फैल रहा था। काल्पनिक कल्पित इंद्र की पूजा की परंपरा थी। उसको श्रीकृष्ण ने बंद कर दिया और गए और प्रकृति की पूजा शुरू की इस समय से यादव कुल में गोवर्धन पूजा का प्रचलन है जो आज भी भारत ही नहीं पूरे दुनिया में गोवर्धन पूजा यादव वंश में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है और भगवान श्री कृष्ण ने मानवता न्याय और सत्य की रक्षा करने के लिए अत्याचारी अन्याई उनके अपने मामा कंस जो मथुरा के राजा थे। उनका भी उन्होंने वध करने के लिए संकल्प लिया और मानवता के रक्षा के लिए उन्होंने अपने मामा का भी वध करके पूरे मथुरा ही नहीं पूरे धरती से सामंतवादी अत्याचारी राजाओं में दहशत पैदा कर दिया का संघार किया और उसके बाद ऐसा समय भी घड़ी उनके जीवन में आया जब उन्होंने अत्याचारी अपने बुआ के पुत्र शिशुपाल का भी भारी राज्यसभा में नारी सम्मान और अपमान की प्रतिवाद में के सम्मान की रक्षा के लिए अपने बुआ के पुत्र शिशुपाल का भी वध करने से तनिक भी वह विचलित नहीं हुई। इसलिए कि पाप धर्म और अन्याय करने वाला कोई रिश्तेदार नहीं होता उसकी जाति अलग होती है यही मानवता और संसार का नियम कहता है।
श्रीकृष्णा दुनिया को बताया की अत्याचार करने वाला अत्याचारी और पाप करने वाला पापी होता है लेकिन अन्याय अत्याचार और पाप को सहन करने वाला उससे भी बड़ा पापी होता है इसलिए जुल्म अत्याचार के विरुद्ध खड़ा होना श्रीकृष्ण का प्रतीक है श्री यादव ने कहा कि यदुकुल यादव वंश में श्री कृष्ण ने जन्म लेकर यादव कल को संसार का सबसे बड़ा वंश और खानदान साबित किया और गीता में संदेश देकर मानव जीवन को सार्थक और जीने की कला विज्ञान तकनीकी और प्रकृति की रक्षा का संदेश देकर पूरे संसार को सनातन यानी प्रकृति के साथ सामंजस्य कर जीने का एक मार्ग बताया इसलिए श्री कृष्ण को विश्व का सबसे बड़ा योगीराज भी कहा जाता है यदुवंश में उन्होंने जन्म लिया इसीलिए उन्हें यादवेंद्र और यादव का यदुकुल शिरोमणि कहा जाता है।





































