आसनसोल कोर्ट ने फैसले में 2023 के गुरुद्वारा चुनाव के साथ मौजूदा कमेटी को बताया अवैध, पुराने कमेटी के पक्ष में आया फैसला
आसनसोल(भरत पासवान)। बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में काबिज होने को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। मामला कोर्ट तक चला गया था, शुक्रवार को इस मामले को लेकर आसनसोल कोर्ट का एक महत्वपूर्ण फैसला आया। इस पूरे मामले को लेकर कोर्ट में मामला करने वाले बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सचिव सुरेंद्र सिंह अत्तू के अधिवक्ता दिव्येंदु घोष ने आसनसोल अदालत परिसर में संवाददाता सम्मेलन किया। उन्होंने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि आसनसोल कोर्ट ने वर्ष 2023 में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व सेक्रेटरी सुरेंद्र सिंह के पक्ष में फैसला सुनाया था। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहा था लेकिन उसके खिलाफ दूसरे पक्ष यानी जसविंदर सिंह और उनके साथियों ने आसनसोल सेकंड कोर्ट में अपील की 2023 में यह अपील की गई थी जिस पर गुरुवार को फैसला आ गया। इस फैसले में सुरेंद्र सिंह के पक्ष में जूनियर डिवीजन कोर्ट ने पहले जो फैसला सुनाया था उसी को मान्यता दी गई और जसविंदर सिंह और उनके साथियों द्वारा बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के संचालन को अवैध करार दे दिया गया। इतना ही नहीं वर्ष 2023 में बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में जो चुनाव हुआ था उसे चुनाव को भी अवैध करार दिया गया। चुनाव के बाद जिस कमेटी का गठन हुआ, उस कमेटी को भी अवैध करार दिया गया। कोर्ट ने कहा है कि जसविंदर सिंह और उनके साथियों को बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के संचालन का कोई अधिकार नहीं है। हालांकि जब दिव्येंदु घोष से पूछा गया कि अब आगे की कार्रवाई क्या होगी तो उन्होंने कहा कि कोर्ट का फैसला बर्नपुर गुरुद्वारा परिसर में चस्पा किया जाएगा ताकि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से जुड़े लोग अदालत के फैसले के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें। पहले की कमेटी को किस तरह से प्रशासन के प्रयोग से और अदालत के फैसले की रोशनी में किस तरह से फिर से स्थापित किया जा सके। सुरेन्द्र सिंह अत्तू ने इस फैसले का स्वागत करते हर कहा कि यह सत्य की जीत हुई है।
वहीं इस मामले को लेकर मौजूदा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बर्नपुर के कानूनी सलाहकार अजीत सिंह ने बताया कि बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के एक प्राइवेट सोसाइटी है। इस सोसाइटी से बर्नपुर गुरुद्वारा का कोई संबंध नहीं है। वहीं यह मामला 9 लोगों पर किया गया था, जिनमें से वे भी एक हैं। वहीं अगर इस मामले को लेकर कोई फैसला आया हो तो इनके अधिवक्ता कोर्ट में इसका जवाब देंगे। साथ ही इस मामले के फैसला का बर्नपुर गुरुद्वारा से कुछ लेना देना नहीं है। दूसरा पक्ष केवल समाज को भ्रमित करने में लगा है।
