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कोर्ट के फैसले के साथ बर्नपुर गुरुद्वारा को कब्जामुक्त कराने की अपील कर प्रशासनिक अधिकारियों को भेजा नोटिस

72 घंटे की समय सीमा समाप्त होने पर पुनः कानूनी कार्रवाई पर बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कर रहा विचार
बर्नपुर(भरत पासवान)। आसनसोल कोर्ट ने बीते दिसंबर को 5 को बर्नपुर गुरुद्वारा का संचालन करने को लेकर बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सचिव सुरेन्द्र सिंह अत्तू के पक्ष में फैसला सुनाया था। साथ ही कोर्ट ने वर्ष 2023 में बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में जो चुनाव हुआ था उसे चुनाव को भी अवैध करार देते हुए चुनाव के बाद जिस कमेटी का गठन हुआ, उस कमेटी को भी अवैध करार दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जसविंदर सिंह और उनके साथियों को बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के संचालन का कोई अधिकार नहीं है। वहीं इस मामले में जीत होने के बाद सुरेंद्र सिंह अत्तू ने 8 दिसंबर को राज्य के डीजीपी, आसनसोल दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के कमिश्नर, एसीपी वेस्ट एवं हीरापुर थाना प्रभारी को कोर्ट के फैसले की प्रति के साथ नोटिस भेजते हुए कोर्ट के आदेश का पालन कर बर्नपुर गुरुद्वारा को कब्जामुक्त करने की अपील की थी। नोटिस भेजने के 72 घंटे बीत जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने पर सुरेन्द्र सिंह अत्तू अब अपने अधिवक्ता से विचार – विमर्श कर पुनः कोर्ट में गुहार लगाने पर विचार कर रहे हैं। इस संबंध में बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रवक्ता परमजीत सिंह ने बताया कि शुक्रवार को इस मामले को लेकर आसनसोल कोर्ट का एक महत्वपूर्ण फैसला आया। साथ ही कोर्ट से इस फैसले की सर्टिफाइड कॉपी मांगी गई है। इस बीच कोर्ट के फैसले का पालन करने को लेकर पश्चिम बर्दवान जिला के सभी प्रशासनिक अधिकारियों को नोटिस भेजा चुका है। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने अपने फैसले में बहुत ही साफ शब्दों में कहा कि 26 मार्च 2023 को बर्नपुर गुरुद्वारा में हुआ चुनाव पूरी तरह से अवैध है एवं इस चुनाव को जीतकर बनी कमेटी भी अवैध है। चुनाव को लेकर कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद चुनाव कराया गया। यहीं नहीं सितम्बर माह से गुरुद्वारा ऑफिस को कब्जा कर संचालन कर रहे थे। इन लोगों ने सोशल मीडिया के साथ समाचार पत्र, डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को भ्रमित कर बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को सोसाइटी बताकर इसका बर्नपुर गुरुद्वारा से कोई संबंध नहीं होने का दावा करते रहे हैं। इस मामले की सुनवाई डेढ़, दो साल चले कोर्ट में चलने के दौरान भी विपक्ष के अधिवक्ता बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को सोसाइटी बताते हुए इसका बर्नपुर गुरुद्वारा से कोई संबंध नहीं होने की दलील देते रहे लेकिन अंत में सत्य की ही जीत हुए है। कोर्ट ने सुरेन्द्र सिंह अत्तू के पक्ष में फैसला सुनाते हुए साफ साफ कह दिया है कि बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ही बर्नपुर गुरुद्वारा की संचालक है। यही कमेटी बर्नपुर गुरुद्वारा का संचालन करेगी। वहीं सुरेन्द्र सिंह अत्तू ने कहा कि बर्नपुर गुरुद्वारा में जबरन चुनाव कराने के पहले बर्नपुर की सम्मानित सिख संगत के साथ अन्य संप्रदाय के सम्मानित लोग जानते थे कि मनमोहन सिंह वाधवा के नेतृत्व वाली 30 सदस्यीय बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ही बर्नपुर गुरुद्वारा का संचालन करती है। जिसमे से सचिव पद पर थे। वहीं अवैध चुनाव कराकर गुरुद्वारा कार्यालय में कब्जा करने वाली कमेटी पर अब कोर्ट ने ही फर्जी होने का ठप्पा लगा दिया है। बर्नपुर की जनता अब यह जान चुकी है कि बर्नपुर गुरुद्वारा का संचालन बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ही करेगी। बर्नपुर गुरुद्वारा के कब्जेदारों को अब कोर्ट के फैसले का सम्मान कर स्वयं बर्नपुर गुरुद्वारा को कब्जामुक्त कर देना चाहिए। वहीं उन्होंने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों को भेजी गई नोटिस के 72 घंटे पूरे हो चुके हैं। इस कारण अब वे अपने अधिवक्ता से विचार – विमर्श कर बर्नपुर गुरुद्वारा को कोर्ट के फैसले के आलोक में कब्जामुक्त करने की पहल तेज करेंगे।

 

       

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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