केंद्र सरकार की तरह सोच वाली सरकार बन गई तो बंगाल के उस तहजीब पर प्रतिकूल असर पड़ेगा – रतनलाल हांसदा
आसनसोल । मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल के विकास के क्षेत्र में एक दृढ़ और जनमुखी नेतृत्व की प्रतीक हैं। उनके नेतृत्व में राज्य के विकास का मुख्य उद्देश्य आम लोगों का कल्याण और सामाजिक न्याय रहा है, ताकि विकास का लाभ शहर से लेकर गाँव तक समान रूप से पहुँच सके। उक्त बातें भारत जाकात माझी परगना नेता रतनलाल हांसदा ने कही। आदिवासी समाज के प्रतिनिधि रतनलाल हांसदा ने कहा की 22 दिसंबर को उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के संबंध में जो बयान दिया था। उसे तोड़ मरोड़ के पेश किया जा रहा है, उन्होंने कभी नहीं कहा था कि ममता बनर्जी ने कुछ भी नहीं किया है। उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि साहित्य भाषा के विकास में कुछ नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि 22 दिसंबर संथाली भाषा विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। उस दिन उन्होंने वह बयान दिया था। लेकिन उन्होंने यह कभी नहीं कहा था कि ममता बनर्जी ने राज्य के विकास के लिए कुछ नहीं किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में वह चाहते हैं कि इस क्षेत्र से ऐसे व्यक्ति को प्रत्याशी बनाया जाए जो आदिवासी समाज के भावनाओं को समझ सके और आदिवासी समाज के लोगों के लिए काम कर सके क्योंकि अगर ऐसा नहीं होगा तो आदिवासी समाज का विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जो यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की बात कही जा रही है। इससे आदिवासियों को जो विशेष सुविधाएं प्राप्त होती हैं। उनसे आदिवासी समाज वंचित होगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का अपना एक सामाजिक ताना-बाना है। अगर कॉमन सिविल कोड लागू हो जाता है तो उस ताने-बाने को चोट पहुंचेगी। उन्होंने साफ कहा कि केंद्र सरकार की वजह से ही मणिपुर में दंगे हुए हैं, आदिवासियों पर अत्याचार हुआ है, इसलिए वह नहीं चाहते कि वैसे कोई सरकार पश्चिम बंगाल में आए। क्योंकि बंगाल का अपना एक इतिहास रहा है। यहां पर सभी धर्म और जातियों के लोग मिलजुल कर रहते हैं। उन्हें डर है कि अगर यहां पर केंद्र सरकार की तरह सोच वाली सरकार बन गई तो बंगाल के उस तहजीब पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।














