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त्रिकुट पर्वत हॉल्ट स्टेशन की नींव रखी गई

तीर्थयात्रियों की कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा

पवित्र त्रिकुटाचल पहाड़ियों पर आध्यात्मिक टूरिज्म का गेटवे

नए हॉल्ट से आस-पास के गांवों के हजारों लोगों को फायदा होगा

आसनसोल । क्षेत्रीय रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और यात्रियों की सुविधा बढ़ाने की दिशा में एक अहम पड़ाव के तौर पर पूर्व रेलवे के आसनसोल मंडल के तहत देवघर-हंसडीहा सेक्शन में मोहनपुर और खैरियाडीह स्टेशनों के बीच मौजूद त्रिकुट पर्वत हॉल्ट स्टेशन की नींव रविवार सांसद निशिकांत दुबे ने रखी। इस मौके पर आसनसोल के मंडल रेलवे प्रबंधक संग्रह मौर्य और रेलवे के अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण और गणमान्य लोग मौजूद थे। इस परियोजना का उद्देश्य झारखंड के ज़रूरी आध्यात्मिक और टूरिस्ट जगहों में से एक तक रेल की पहुँच को बेहतर बनाना है।
निशिकांत दुबे ने कहा कि नया हॉल्ट स्टेशन यात्रियों को फ़ायदा पहुँचाएगा, टूरिज़्म को बढ़ावा देगा और इलाके के विकास में मदद करेगा। उन्होंने आगे कहा कि यह हॉल्ट स्टेशन, स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही माँग को पूरा करते हुए हिंडोलाबरन, बड़ा झरना, छोटा झरना, सतीघाट, खरैयाडीह और सिंग रेड्डी जैसे आस-पास के गाँवों को सीधी रेल कनेक्टिविटी देगा, जिससे दूर के स्टेशनों पर निर्भरता कम होगी और छात्रों, मज़दूरों तथा स्थानीय लोगों के लिए रोज़ाना का सफ़र आसान होगा।
प्रस्तावित त्रिकुट पर्वत हॉल्ट स्टेशन को लगभग 3 करोड़ रुपये से ज़्यादा की लागत से बनाया जाएगा। यात्रियों की सुविधा और पहुँच को बढ़ाने के लिए एक विकासात्मक योजना तैयार किया गया है। मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर में यात्रियों के लिए शेल्टर, अप्रोच रोड, बुकिंग-कम-वेटिंग हॉल और बैठने की व्यवस्था के साथ एक हाई-लेवल प्लेटफ़ॉर्म बनाना, पीने के पानी की सुविधा, पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, काफ़ी लाइटिंग और पंखे लगाना, और दिव्यांगजनों के लिए पहुँच सुविधाएँ शामिल हैं। देवघर शहर से करीब 10 किलो मीटर दूर त्रिकूट पर्वत (त्रिकुटाचल) झारखंड का एक खास ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और इको-टूरिज्म लैंडमार्क है। ब्रह्मा, विष्णु और महेश की निशानी तीन पवित्र चोटियों के लिए मशहूर यह पहाड़ी पुरानी आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ी है। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक, बैद्यनाथ धाम के पास होने की वजह से यहाँ साल भर तीर्थयात्री आते हैं। त्रिकूटचल महादेव मंदिर, पुरानी मेडिटेशन गुफाएँ, रोपवे की सुविधा और सुंदर प्राकृतिक माहौल त्रिकूट पर्वत को एक बड़ा आध्यात्मिक और टूरिज्म सेंटर बनाते हैं, जहाँ खासकर श्रावण महीने और त्योहारों के मौसम में बहुत ज़्यादा लोग आते हैं। मयूराक्षी नदी झारखंड के देवघर में त्रिकूट पहाड़ियों से निकलती है, और भागीरथी-हुगली नदी में मिलने से पहले झारखंड और पश्चिम बंगाल से होकर बहती है। यह नदी आस-पास के इलाकों में सिंचाई और इलाके के विकास के लिए ज़रूरी है। त्रिकुट पर्वत हॉल्ट स्टेशन की नींव रखने से इस इलाके में बेहतर रेल कनेक्टिविटी, धार्मिक टूरिज्म में बढ़ोतरी, स्थानीय रोज़गार के मौके और पूरे सामाजिक-आर्थिक विकास की शुरुआत होगी।

 

  

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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