“भूमिपुत्र” की मांग से गरमाई रानीगंज की सियासत, पेयजल संकट के बीच स्थानीय चेहरे को टिकट देने की उठी जोरदार मांग
आखिर कौन बनेगा रानीगंज का चुनावी चेहरा?
रानीगंज । रानीगंज टीएमसी टिकट की दौड़ में चार चेहरे, रानीगंज विधानसभा क्षेत्र में चुनावी हलचल तेज हो गई है। इस बार राजनीतिक बहस का केंद्र है—“भूमिपुत्र” को उम्मीदवार बनाए जाने की मांग। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि क्षेत्र के ही किसी चेहरे को टिकट मिलता है, तो जमीनी समस्याओं का समाधान अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
ममता नबनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से इस सीट के लिए चार प्रमुख नाम चर्चा में हैं, रूपेश यादव, पार्थ देवासी, विष्णु देव नोनिया और तापस बनर्जी। पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर आम नागरिकों तक, संभावित दावेदारों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।
रूपेश यादव: जमीनी पकड़ और संगठनात्मक मजबूती। रूपेश यादव को इलाके में “भूमिपुत्र” के रूप में जाना जाता है। समर्थकों के अनुसार वे लंबे समय से क्षेत्र के लोगों के साथ जुड़े रहे हैं और संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि:
वाम मोर्चा शासनकाल में विपक्षी दौर से सक्रिय राजनीति की शुरुआत
2003–2008: अंडाल में यूथ तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष
2013–2018: जिला परिषद के कर्माध्यक्ष (एकीकृत वर्धमान जिला)
जिला पुनर्गठन के बाद पश्चिम बर्दवान जिला यूथ तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष
आसनसोल नगर निगम चुनाव में रानीगंज से पार्षद निर्वाचित
वर्तमान: रानीगंज टाउन ब्लॉक अध्यक्ष एवं पश्चिम बर्दवान जिला तृणमूल कांग्रेस के महासचिव
स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि अनुभव, संगठन क्षमता और सर्वसमाज से संवाद उनकी प्रमुख ताकत है।
पार्थ देवासी: युवा ऊर्जा और जनसंपर्क
“दुआरे प्रधान” जैसी पहल के माध्यम से घर-घर जाकर समस्याएं सुनने को लेकर पार्थ देवासी चर्चा में रहे। छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका सफर अब जिला नेतृत्व तक पहुंच चुका है।
राजनीतिक यात्रा:
2009–2011: खांद्रा कॉलेज स्टूडेंट यूनियन अध्यक्ष
2011–2012: टीएमसीपी खांद्रा कॉलेज जीएस
2012–2014: अंडाल ब्लॉक छात्र परिषद अध्यक्ष
2014–2020: अंडाल ब्लॉक युवा तृणमूल अध्यक्ष
2020–2022: जिला युवा तृणमूल उपाध्यक्ष
2022–2023: अंडाल ब्लॉक आईएनटीटीयूसी अध्यक्ष
2023–2026: जिला युवा तृणमूल अध्यक्ष
वर्तमान: मदनपुर ग्राम पंचायत प्रधान
युवा मतदाताओं के बीच उनकी सक्रियता और पहुंच को उनकी प्रमुख ताकत माना जा रहा है।
विष्णु देव नोनिया: लंबा अनुभव और सेवा भाव
विष्णु देव नोनिया का राजनीतिक जीवन कई संगठनों से जुड़ा रहा है। कोविड लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने में उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें सेवा-भावी नेता की पहचान दी।
राजनीतिक सफर:
1980–1983: नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) से जुड़े
1983: इंटक व कांग्रेस से जुड़े
1990: माकपा में शामिल
2015: तृणमूल कांग्रेस में प्रवेश
2018–2023: पश्चिम बर्धमान से जिला परिषद सदस्य निर्वाचित
वर्तमान: पश्चिम बर्धमान जिला परिषद उपाध्यक्ष
सदस्य: कोल इंडिया वेलफेयर बोर्ड,( ईसीएल)
तापस बनर्जी: अनुभव का दांव
तापस बनर्जी का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल है। उनके राजनीतिक अनुभव और पुराने संगठनात्मक समीकरणों को देखते हुए उनका दावा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि उन्हें मौका मिलता है, तो मुकाबला और रोचक हो सकता है।
पेयजल संकट बना चुनावी केंद्र
रानीगंज क्षेत्र में पेयजल संकट को सबसे बड़ी समस्या माना जा रहा है। कई इलाकों में पानी की कमी को लेकर विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं।
जनता की मांग है कि इस बार ऐसा उम्मीदवार सामने आए जो केवल वादे न करे, बल्कि स्थायी समाधान की स्पष्ट कार्ययोजना पेश करे।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में लगभग 65 फीसदी हिंदी भाषी आबादी और करीब 75 फीसदी हिंदू आबादी बताई जाती है। ऐसे में सामाजिक और भाषाई समीकरण भी टिकट चयन में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
गुटबाजी की चुनौती
उम्मीदवार चयन से पहले पार्टी के सामने आंतरिक गुटबाजी एक बड़ी चुनौती है। अलग-अलग गुटों की सक्रियता टिकट वितरण को प्रभावित कर सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि 2026 के चुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता कायम हो जाती है, तो इसका सीधा असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है।
अब नजर अंतिम फैसले पर
“भूमिपुत्र” की मांग ने रानीगंज की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। अब सबकी निगाहें टीएमसी नेतृत्व के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।
आने वाले दिनों में टिकट की घोषणा के साथ तस्वीर साफ होगी—
आखिर कौन बनेगा रानीगंज का चुनावी चेहरा?
