“सिया–केतन प्रकरण से सीख: सुरक्षित समाज की शुरुआत परिवार से, संवाद और संस्कार जरूरी – विनोद सांतोरिया
आसनसोल, 27 जून 2026। सिया–केतन प्रकरण जैसी दुखद घटनाएं केवल समाचार नहीं रह जातीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी बन जाती हैं। इस प्रकरण ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बच्चों का भविष्य तय कर देना ही काफी नहीं है, उनके मन को समझना उतना ही जरूरी है।
समाजसेवी विनोद सांतोरिया ने इस घटना के बाद हर परिवार से आत्ममंथन की अपील की है। उन्होंने कहा कि हर माता-पिता को खुद से कुछ सवाल पूछने चाहिए:
परिवारों से 5 जरूरी सवाल:
1. क्या हमारे घर में बच्चे बिना डर के अपनी बात कह सकते हैं?
2. क्या हमने उन्हें केवल आज्ञाकारी बनाया है या निर्णय लेने योग्य भी बनाया है?
3. क्या हम विवाह को केवल सामाजिक दायित्व मानते हैं या दो व्यक्तियों की स्वतंत्र सहमति भी उतनी ही महत्वपूर्ण समझते हैं?
4. क्या हमने अपने बच्चों को सिखाया है कि अस्वीकार, असफलता और रिश्तों का टूटना जीवन का अंत नहीं होता?
5. क्या हमने उन्हें क्रोध पर नियंत्रण, संवाद और कानून का सम्मान करना सिखाया है?
विनोद सांतोरिया ने कहा, _”माता-पिता का दायित्व केवल अच्छी शिक्षा, अच्छा करियर और अच्छा रिश्ता ढूंढना नहीं है। उतना ही आवश्यक है बच्चों के भीतर भावनात्मक परिपक्वता, आत्मसंयम, संवेदनशीलता और नैतिक साहस का विकास करना।”_
बच्चों को ये 4 संस्कार जरूर दें:
1. प्रेम कभी हिंसा का कारण नहीं बन सकता
2. किसी का “ना” सम्मान के साथ स्वीकार करना भी एक संस्कार है
3. कोई भी समस्या हत्या, आत्महत्या या प्रतिशोध से बड़ी नहीं होती
4. कठिन समय में परिवार, मित्र, परामर्शदाता या कानून की सहायता लेना कमजोरी नहीं, समझदारी है
उन्होंने कहा, _”बच्चे केवल हमारे शब्दों से नहीं, हमारे व्यवहार, संवाद और निर्णयों से भी सीखते हैं। यदि घर में विश्वास होगा तो बच्चे अपनी उलझनें छिपाएंगे नहीं। यदि संवाद होगा तो कई त्रासदियां जन्म लेने से पहले ही रुक सकती हैं। एक सुरक्षित समाज की शुरुआत अदालतों से नहीं, परिवारों से होती है।”_
व्यवसायी सुरेन जालान ने किया समर्थन:
आसनसोल के वरिष्ठ व्यवसायी सुरेन जालान ने विनोद सांतोरिया के सुझाव की सराहना करते हुए कहा, _”विनोद सांतोरिया का सुझाव बहुत अच्छा लगा। इसे तुष्टिकरण नहीं करना चाहिए। इस समाज के लोगों को बैठकर सोचना चाहिए कि हम अपने बच्चों को क्या संस्कार दे रहे हैं। सिर्फ विरोध प्रदर्शन से कुछ नहीं होगा, घर-घर में संवाद शुरू करना पड़ेगा।” उन्होंने कहा कि हर समाज में सबसे ज्यादा लड़कों वालों की समस्या हो रही है। वर्तमान समय में लड़कियों को वो एसो आराम चाहिए जो ठीक नहीं है। वही उन्होंने कहा कि लड़कों वाले खुल कर नहीं बोल पा रहे हैं कि उनके लड़कों की शादी करवाओ। जिनकी उम्र पार होती जा रही है। आज की यह एक बहुत बड़ी समस्या है।
सिया–केतन प्रकरण ने समाज को आईना दिखाया है। अब जरूरत है कि हर घर में बच्चों के साथ दोस्ती वाला संवाद शुरू हो, ताकि आने वाली पीढ़ी भावनात्मक रूप से मजबूत बन सके।














