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“आसनसोल नगर निगम में इस्तीफों का तूफान: 3 पार्षदों ने एक साथ छोड़ा पद, बंगाल की राजनीति पर भी उठे सवाल”

आसनसोल।  आसनसोल नगर निगम में शुक्रवार का दिन इस्तीफों के नाम रहा। एक के बाद एक 3 पार्षदों ने अपने पद से त्यागपत्र देकर निगम की राजनीति में भूचाल ला दिया। वार्ड 78, 72 और 84 से पार्षदों के इस्तीफे ने सत्ताधारी दल के अंदर की खींचतान को भी उजागर कर दिया।

किसने-कब दिया इस्तीफा
वार्ड 78 से पार्षद अशोक रुद्र, वार्ड 72 के पार्षद और बोरो चेयरमैन चैतन्य माझी, और वार्ड 84 के पार्षद डॉ. देवाशीष सरकार ने शुक्रवार को अपना इस्तीफा सौंपा। खास बात ये कि चैतन्य माझी ने पार्षद पद के साथ बोरो चेयरमैन की कुर्सी भी छोड़ दी। डॉ. देवाशीष सरकार ने तो बोरो चेयरमैन पद से पहले ही किनारा कर लिया था, अब उन्होंने पार्षद पद भी छोड़ दिया।

“सत्ता परिवर्तन के बाद जिम्मेदारी निभाना मुश्किल” – डॉ. सरकार
डॉ. देवाशीष सरकार ने बताया कि उन्होंने इस्तीफा इसलिए नहीं दिया था ताकि लोगों के जरूरी कागजों पर दस्तखत का काम अटक न जाए। अब जब वो काम निपटा, तो उन्होंने पद छोड़ दिया। उनका साफ कहना है कि “बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद मैं संविधान के हिसाब से अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा पा रहा था। इसी वजह से इस्तीफा दिया।”

पार्टी को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि “मुझे टिकट जिस पार्टी ने दिया, मैं उसी में हूं। पर अभी पार्टी का नाम, सिंबल सब पर विवाद चल रहा है, इसलिए कुछ कहना ठीक नहीं।”

“मां की बीमारी बनी वजह” – चैतन्य माझी
बोरो चेयरमैन चैतन्य माझी ने इस्तीफे की वजह निजी बताई। उन्होंने कहा कि उनकी मां की तबीयत लगातार खराब रहती है और पिता का देहांत हो चुका है। इलाज के लिए उन्हें बार-बार बाहर जाना पड़ता है, जिसकी वजह से वो जनता की सेवा ठीक से नहीं कर पा रहे थे। बारिश के मौसम से पहले पद छोड़ने पर उन्होंने कहा, “पद पर नहीं हूं, पर लोगों के साथ हमेशा खड़ा रहूंगा।”

डिप्टी मेयर बोले – ये लोकतंत्र है
इस्तीफों की कतार पर डिप्टी मेयर वसीम उल हक ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपना फैसला लेने का अधिकार है। “जो लोग समझते हैं कि वो काम ठीक से नहीं कर पा रहे, उन्हें इस्तीफा देने का पूरा हक है। मैं उनके व्यक्तिगत फैसले का सम्मान करता हूं।”

बारिश के मौसम में निगम के काम पर असर को लेकर उन्होंने कहा, “ये तो समय ही बताएगा।”

आगे क्या?
एक साथ 3 वार्ड खाली होने से आसनसोल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर असर पड़ना तय है। साथ ही इस्तीफे की वजहों ने राज्य की बदलती सियासी तस्वीर और तृणमूल के अंदरूनी मतभेदों पर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

  

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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