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“रानीगंज की 191वीं रथयात्रा: हेरिटेज घोषित हुआ मेला, मुफ्त स्टॉल से गुलजार हुआ बाजार”

रानीगंज। बंगाल में पूजा के आगाज का प्रतीक मानी जाने वाली रानीगंज की ऐतिहासिक रथयात्रा गुरुवार को पूरे भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुई। पश्चिम बर्दवान जिले के सिरशोल राजबाड़ी में आयोजित इस 191वीं रथयात्रा में दूर-दूर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने रथ की रस्सी खींचकर पुण्य अर्जित किया।

रानीगंज-आसनसोल-दुर्गापुर औद्योगिक क्षेत्र में गुरुवार को उत्सव का माहौल देखने को मिला। सुबह से ही सिरशोल राजबाड़ी परिसर जय जगन्नाथ के नारों से गूंज उठा।

मंत्री-विधायकों ने खींची रथ की रस्सी
इस भव्य आयोजन में राज्य सरकार के कई गणमान्य लोग शामिल हुए। रथ की रस्सी नगर निगम एवं नगर विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने खींची। उनके साथ P.W.D मंत्री डॉ. अजय पोद्दार, रानीगंज के विधायक पार्थ घोष और जामुड़िया के विधायक डॉ. बिजन मुखर्जी भी रथ खींचते नजर आए।

राज परिवार की ओर से अनुराधा मालिया सराफ और बिट्टल नाथ मालिया सहित राजबाड़ी के सदस्य भी इस परंपरा में शामिल हुए।

सरकार ने रथ मेले को दी ‘हेरिटेज’ की मान्यता
इस साल की सबसे बड़ी घोषणा यह रही कि राज्य सरकार ने रानीगंज के इस पारंपरिक रथ मेले को आधिकारिक तौर पर ‘हेरिटेज मेला’ का दर्जा दिया। इससे मेले की ऐतिहासिक महत्ता और बढ़ गई है।

1835 से चली आ रही है परंपरा
रानीगंज की यह रथयात्रा साल 1835 में शुरू हुई थी। शुरुआत में लकड़ी का रथ निकाला जाता था। 1923 में लकड़ी के रथ की जगह पीतल का भव्य रथ बनाया गया, जो आज भी आकर्षण का केंद्र है। खदान क्षेत्र के लोग इस मेले का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

इस बार मेले की खासियत: मुफ्त स्टॉल से सस्ते हुए सामान
इस वर्ष का मेला पिछले वर्षों से अलग रहा। प्रशासन ने इस बार दुकानदारों को बिल्कुल मुफ्त में स्टॉल उपलब्ध कराए। इसका सीधा फायदा आम लोगों को मिला। स्टॉल फ्री होने के कारण बाजार में सामानों की कीमतें काफी कम रहीं। नतीजतन खरीदारों और दुकानदारों दोनों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

भक्तों का कहना है कि रानीगंज की रथयात्रा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की संस्कृति और एकता का प्रतीक है।

 

  

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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