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“रूपनारायणपुर: प्रधान के पति का ‘सुपर पीएम’ राज! महिलाओं ने कॉलर पकड़कर पंचायत कार्यालय से निकाला बाहर”

रूपनारायणपुर।  रूपनारायणपुर ग्राम पंचायत में मंगलवार को उस समय हंगामा मच गया जब बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाओं ने पंचायत कार्यालय पहुंचकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान गुस्साई महिलाओं ने पंचायत प्रधान के पति बिपन दास को कॉलर पकड़कर कार्यालय से बाहर निकाल दिया। घटना का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

पति चलाते हैं पूरा पंचायत” – महिलाओं का आरोप
प्रदर्शनकारी महिलाओं का आरोप है कि पंचायत की *निर्वाचित प्रधान अपर्णा दास* हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर *पूरा कामकाज उनके पति बिपन दास* ही संभालते हैं। महिलाओं का कहना है कि प्रधान पद महिला के नाम पर है, लेकिन सभी महत्वपूर्ण फैसले उनके पति लेते हैं।

स्वजनपोषण और जमीन घोटाले के भी लगे आरोप
महिलाओं ने पंचायत में स्वजनपोषण और जमीन से जुड़े मामलों में भारी अनियमितता का भी आरोप लगाया

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पंचायत के विकास कार्यों में लंबे समय से गड़बड़ी चल रही है। सबसे बड़ा आरोप सरकारी खास जमीन के हस्तांतरण को लेकर है। महिलाओं का दावा है कि बिना किसी जांच के पंचायत से एनओसी जारी कर दी गई।

पुलिस ने दिया आश्वासन, तब शांत हुआ मामला
विरोध के दौरान महिलाओं ने पंचायत कार्यालय में जमकर नारेबाजी की। इसी बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई और महिलाओं ने प्रधान के पति को कॉलर पकड़कर बाहर कर दिया। इससे कुछ देर के लिए कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

सूचना मिलते ही रूपनारायणपुर फाड़ी की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की।

महिलाओं ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच होने पर पंचायत से जुड़े कई भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा होगा।

पुलिस का आश्वासन: पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि अगले दिन से पंचायत कार्यालय या परिसर में प्रधान के पति की मौजूदगी नहीं होगी और सरकारी कामों में उनके हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पुलिस के इस मौखिक आश्वासन के बाद महिलाओं ने अपना आंदोलन वापस ले लिया और स्थिति सामान्य हुई।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
इस घटना के बाद पूरे रूपनारायणपुर ग्राम पंचायत क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। लोग इसे “प्रॉक्सी पंचायत” का मामला बता रहे हैं।

 

 

  

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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