“तुलसीदास जयंती पर देशभर में गूंजा रामचरितमानस: 500 प्रतिभागियों ने लिया ऑनलाइन क्विज में हिस्सा, तेलंगाना की अर्पिता झावर बनीं विजेता”
आसनसोल । गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती के पावन अवसर पर 19 अगस्त 2026 को देशभर में राम भक्ति और भारतीय संस्कृति की धूम रही। अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन के राष्ट्रीय प्रकल्प “संस्कार संस्कृति 2026-28” के तहत पूरे देश में रामचरितमानस आधारित राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया।
500 से ज्यादा प्रतिभागियों ने दिखाया ज्ञान
इस ऑनलाइन क्विज में रामचरितमानस, भगवान श्रीराम के आदर्शों, तुलसीदास जी के जीवन और साहित्य से जुड़े कुल 50 प्रश्न पूछे गए।
देश के कोने-कोने से लगभग 500 प्रतिभागियों ने इस ज्ञानवर्धक प्रतियोगिता में उत्साह के साथ भाग लिया। प्रतिभागियों ने बताया कि इस क्विज के जरिए उन्हें रामचरितमानस को नए सिरे से पढ़ने और समझने का अवसर मिला।
मधु डुमरेवाल की पहल को मिली सराहना
पूरे कार्यक्रम की मुख्य संयोजक और राष्ट्रीय तकनीक प्रमुख मधु डुमरेवाल रहीं। तकनीक के माध्यम से संस्कृति को जोड़ने की उनकी इस पहल की देशभर में जमकर सराहना हुई।
कई प्रतिभागियों और शुभचिंतकों ने इसे “भारतीय संस्कार, संस्कृति और रामचरितमानस के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने” वाली सार्थक पहल बताया।
कार्यक्रम को राष्ट्रीय अध्यक्ष रेखा राठी, राष्ट्रीय सचिव बबीता बगड़िया और संस्कार संस्कृति प्रकल्प की राष्ट्रीय प्रमुख मीना तोदी, पदमा गोयनका एवं मंजू भराड़िया का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
ये रहे क्विज के विजेता
कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद तीन विजेताओं की घोषणा की गई:
1. प्रथम स्थान: अर्पिता झावर – तेलंगाना
2. द्वितीय स्थान: संतोष अग्रवाल – पश्चिम बंगाल
3. तृतीय स्थान: प्रेमा अग्रवाल – छत्तीसगढ़
तीनों विजेताओं को राष्ट्र स्तर का प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही अयोध्या के पी.डी. ज्वेलर्स की ओर से विजेताओं को विशेष उपहार के रूप में हस्तलिखित ‘राम नाम’ वाली रामचरितमानस पुस्तक भेंट की जा रही है।
आसनसोल में हुआ काव्य पाठ
तुलसीदास जयंती पर सम्मेलन की विभिन्न शाखाओं ने भी देशभर में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए।
पश्चिम बंगाल की आसनसोल शाखा द्वारा रामचरितमानस काव्य पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें 20 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
विजेताओं में किरण अग्रवाल, शकुंतला भुवालका, शीतल जालान और सीमा अग्रवाल शामिल रहीं।
आयोजकों का संकल्प
आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों, शाखाओं, सहयोगियों और शुभचिंतकों का आभार जताते हुए कहा कि “संस्कार, संस्कृति, साहित्य और ज्ञानवर्धन” से जुड़े ऐसे कार्यक्रम भविष्य में भी निरंतर आयोजित किए जाएंगे ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।














