कुल्टी स्टेशन के CSR शौचालय पर बड़ा अपडेट! Pay & Use टॉयलेट के संचालन के लिए रेलवे ने निकाला ई-ऑक्शन, 21 सितंबर तक लगा सकेंगे बोली
कुल्टी | शिल्पांचल टुडे
कुल्टी स्टेशन से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक जरूरी खबर है। पूर्व रेलवे के आसनसोल डिवीजन ने कुल्टी स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर बने Pay & Use शौचालय के संचालन के लिए ई-ऑक्शन निकाला है।
रेलवे के टेंडर रिकॉर्ड में इसे “Pay & Use Toilets constructed by CSR initiative at PF No. 1 at HWH end near PA Office of Kulti Station” के नाम से लिस्ट किया गया है।
क्या है टेंडर की डिटेल?
– टेंडर रेफरेंस: 57359590
– जगह: कुल्टी स्टेशन, प्लेटफॉर्म-1, हावड़ा छोर पर PA ऑफिस के पास
– सुविधा: CSR पहल से बना Pay & Use शौचालय
– प्रक्रिया: नीलामी / कॉन्ट्रैक्ट
– बोली की आखिरी तारीख: 21 सितंबर 2026
– कैटेगरी: रेलवे ट्रांसपोर्ट सर्विस
इसी टेंडर में बाराचक स्टेशन के दक्षिणी सर्कुलेटिंग एरिया में CSR से बने शौचालय को भी शामिल किया गया है।
यात्रियों के लिए क्यों अहम है ये टेंडर?
स्टेशन पर साफ-सुथरा शौचालय यात्रियों की सबसे बुनियादी जरूरत है। Pay & Use मॉडल में ठेकेदार को साफ-सफाई, पानी और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाती है। अगर सही एजेंसी को ठेका मिलता है तो यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।
सबसे बड़ा सवाल – CSR से बना तो ठेका क्यों?
यही इस खबर का सबसे दिलचस्प पहलू है। CSR के तहत किसी कंपनी ने इसे बनवाया और अब रेलवे इसके संचालन के लिए ठेका दे रहा है। यह सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इससे कई सवाल खड़े होते हैं जिनके जवाब अभी तक साफ नहीं हैं।
शिल्पांचल टुडे के 5 बड़े सवाल:
1. इस CSR टॉयलेट का निर्माण किस कंपनी ने कराया था और कितनी लागत आई?
2. यह शौचालय कब बनकर तैयार हुआ था?
3. क्या बनने के बाद से यह लगातार यात्रियों के लिए खुला रहा है?
4. नया ठेका कितने साल के लिए दिया जा रहा है और यात्रियों से कितना शुल्क वसूला जाएगा?
5. साफ-सफाई को लेकर ठेकेदार के लिए क्या शर्तें रखी गई हैं?
“शौचालय बिक रहा है” कहना गलत है
सोशल मीडिया पर इसे “शौचालय की बिक्री” के तौर पर देखा जा रहा है, जो गलत है। रेलवे शौचालय को बेच नहीं रहा, बल्कि उसके संचालन और मेंटेनेंस का अधिकार नीलाम कर रहा है।
बता दें कि कुल्टी स्टेशन पर शौचालय के साथ-साथ 4,133 वर्ग फुट के पार्किंग एरिया के लिए भी 3 साल का अलग टेंडर निकाला गया है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस CSR टॉयलेट के संचालन का ठेका किसे मिलता है और इससे यात्रियों को कितनी राहत मिलती है।














