हर थाने में होगी मां काली की पूजा? मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने दिया प्रस्ताव, बयान पर शुरू हुई चर्चा
सिउड़ी: पश्चिम बंगाल के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने काली पूजा को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह पुलिस थानों में विजय सम्मिलनी का आयोजन किया जाता है, उसी तरह राज्य के प्रत्येक थाने में मां काली की पूजा भी आयोजित की जानी चाहिए। गुरुवार, 29 अक्टूबर को बीरभूम जिला पुलिस के विजय सम्मिलनी कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही।
मंत्री ने क्या कहा?
मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा कि प्रत्येक पुलिस थाने में मां काली की प्रतिमा होनी चाहिए और वहां धूमधाम से काली पूजा आयोजित की जानी चाहिए।
अपनी बात रखते हुए उन्होंने बंगाल के प्रसिद्ध डाकू रघु डाकैत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि रघु डाकैत भी डकैती करने जाने से पहले मां काली की पूजा करता था।
मंत्री के अनुसार, पुलिस भी शक्ति की उपासक है। थाने में मां काली की प्रतिमा होने से पुलिसकर्मी किसी अभियान पर निकलने से पहले मां का आशीर्वाद ले सकेंगे। उन्होंने इस पहल को बंगाल की सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि जैसे स्कूलों में सरस्वती पूजा होती है, वैसे ही थानों में काली पूजा भी परंपरा का हिस्सा बन सकती है।
बीरभूम के थानों को लेकर विशेष अपील
मंत्री ने बीरभूम के पुलिस अधीक्षक से विशेष अपील करते हुए कहा कि जिले के थानों में काली पूजा का आयोजन किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से शक्तिपीठों और सिद्धपीठों के आसपास स्थित थानों में इस आयोजन पर जोर दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके प्रस्ताव को केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, इसका उद्देश्य पुलिस बल में शक्ति और आत्मविश्वास की भावना को बढ़ावा देना है।
पुलिस की निष्पक्षता पर भी दिया संदेश
कार्यक्रम में मंत्री ने पुलिस अधिकारियों को राजनीतिक दबाव से दूर रहकर काम करने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस को किसी नेता या मंत्री के प्रभाव में आए बिना निष्पक्षता से अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए।
उन्होंने बीरभूम जिला पुलिस से ऐसा काम करने का आह्वान किया, जिससे उसकी कार्यप्रणाली पूरे राज्य के लिए एक उदाहरण बन सके।
क्या सभी थानों में काली पूजा अनिवार्य होगी?
फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मंत्री ने सभी थानों में काली पूजा आयोजित करने का प्रस्ताव और अपील की है। इसे राज्य के प्रत्येक थाने के लिए लागू किए गए आधिकारिक अनिवार्य आदेश के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।














