20 साल बाद फिर जलेगी जे.के. नगर की भट्ठी? वेदांता की एंट्री से आसनसोल में दिवाली जैसा जश्न, 10 हजार नौकरियों की उम्मीद
आसनसोल, शिल्पांचल टुडे।
जे.के. नगर… नाम सुनते ही कभी बंगाल के औद्योगिक गौरव की तस्वीर सामने आती थी, फिर बंद ताले और वीरान चिमनियों का सन्नाटा। लेकिन अब एक खबर ने पूरे शिल्पांचल में फिर से जान फूंक दी है। क्या सच में जे.के. नगर की बंद चिमनियों से फिर धुआं उठेगा?
बुधवार को नबान्न में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल की मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात और आसनसोल में बड़ी एल्युमिनियम इकाई लगाने की चर्चा ने पूरे इलाके में जश्न का माहौल बना दिया है।
मिठाई और अबीर से जश्न, गूंजा ‘जय श्री राम’
खबर मिलते ही जेमारी और जे.के. नगर टाउनशिप में लोग सड़कों पर निकल आए। लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई, केसरिया गुलाल लगाया और आतिशबाजी की। दशकों से रोजगार की आस लगाए बैठे परिवारों की आंखों में फिर से उम्मीद लौट आई है।
स्थानीय युवाओं ने कहा, “हमने सिर्फ बंद गेट देखे हैं। अगर वेदांता आता है तो हमारे लिए यहीं रोजगार मिलेगा, बाहर नहीं जाना पड़ेगा।”
क्यों है जे.के. नगर परफेक्ट लोकेशन?
बंद पड़े एल्युमिनियम कारखाने के पूर्व कर्मचारियों का कहना है कि जे.के. नगर एल्युमिनियम के लिए सोने पर सुहागा है।
– पास में दामोदर नदी – पानी की कोई कमी नहीं
– कोयले की खदानें – बगल में ही ईंधन
– NH और रेलवे – माल ढुलाई आसान
उनका मानना है कि प्लांट खुला तो सिर्फ 10 हजार नौकरियां ही नहीं, बल्कि पूरा बाजार, ट्रांसपोर्ट, दुकानदारी सब फिर से जिंदा हो जाएगा।
अग्निमित्रा पाल ने क्या कहा?
आसनसोल दक्षिण की विधायक और राज्य सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पाल ने खुशी जताते हुए कहा, “यह मेरे लिए बेहद खुशी की बात है। वेदांता ने मुख्यमंत्री से मिलकर आसनसोल में उद्योग लगाने में रुचि दिखाई है, मैं उनका आभार जताती हूं। बंगाल के हर कोने में उद्योग आना चाहिए।”
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित प्रोजेक्ट से लगभग 10,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
सियासत भी तेज
भाजपा का स्वागत: भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि डबल इंजन सरकार का असर है। बंद कारखानों को खोलने का जो वादा था, वह अब जमीन पर उतर रहा है।
माकपा ने उठाए सवाल: वहीं माकपा के रानीगंज एरिया सचिव सुप्रियो राय ने कहा, “अगर घोषणा हुई है तो स्वागत है, लेकिन हमने पहले भी देखा है। शालबनी में जिंदल का बड़ा प्रोजेक्ट घोषित हुआ था, पर जमीन पर कुछ नहीं उतरा। इसलिए कागज से फैक्ट्री तक का सफर तय होना जरूरी है।”
अब सबकी नजरें 5 नवंबर पर
स्थानीय लोगों की खुशी जायज है, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है। 5 नवंबर को जब नई औद्योगिक नीति आएगी और वेदांता के साथ MoU की आधिकारिक डिटेल सामने आएगी, तभी साफ होगा कि जे.के. नगर की चिमनी कब धुआं उगलेगी और युवाओं के हाथों में कब आएगा नियुक्ति पत्र।
फिलहाल, उम्मीद की एक लौ जल चुकी है।














