बंगाल में स्वास्थ्य साथी में ‘महाघोटाला’ का आरोप! मृत लोगों के नाम पर बने इलाज के बिल, 30 लाख लाभार्थी संदिग्ध – अब होगी स्वतंत्र जांच
शिल्पांचल टुडे, कोलकाता।
बंगाल की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना स्वास्थ्य साथी अब सबसे बड़े विवाद में फंस गई है। नई सरकार ने आरोप लगाया है कि पिछली सरकार के कार्यकाल में इस योजना में करोड़ों रुपये की हेराफेरी हुई है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शरद्वत मुखर्जी ने कहा है कि वह इस पूरे मामले की जांच अब स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराएंगे।
1. 30 लाख संदिग्ध कार्ड कैसे पकड़े गए?
दरअसल जब आयुष्मान भारत और नई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए घर-घर जाकर सत्यापन किया गया, तब गड़बड़ी सामने आई।
कई कार्ड ऐसे मिले जिनका पता ही नहीं मिला, कई लोगों की पहचान ही नहीं हो पाई। मंत्री के मुताबिक शुरुआती जांच में 25 से 30 लाख कार्ड संदिग्ध लगे हैं। हालांकि अभी इन्हें फाइनल रूप से फर्जी घोषित नहीं किया गया है।
2. सबसे चौंकाने वाला आरोप – मरे हुए लोगों का इलाज!
मंत्री ने 3 नवंबर को सबसे सनसनीखेज आरोप लगाया। उन्होंने कहा – “कई मामलों में मरीज की अस्पताल में मौत हो गई, लेकिन 2-3 साल बाद उसी मरीज के नाम पर फिर से भर्ती, ऑपरेशन और इलाज का बिल बना दिया गया। और बीमा कंपनी ने पैसा भी दे दिया!”
अगर यह आरोप सही निकला तो यह सिर्फ फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि सिस्टम में मिलीभगत का बड़ा खेल है।
3. कौन-कौन है जांच के घेरे में?
मंत्री के मुताबिक जांच के दायरे में आ सकते हैं –
निजी अस्पताल और नर्सिंग होम, फर्जी डॉक्टर, बीमा कंपनियां, थर्ड पार्टी एजेंसियां और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ अस्पतालों ने भी मंत्री को लिखित शिकायत दी है। एक मेडिकल अधिकारी पर रिश्तेदारों के नाम पर नर्सिंग होम खोलकर फर्जी बिल बनाने का भी आरोप है।
4. कितने करोड़ का खेल?
मंत्री ने शुरुआत में 20 से 30 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का अनुमान लगाया था। उनका कहना है कि संदिग्ध कार्डों के प्रीमियम पर सरकार हर साल करीब 30 करोड़ रुपये बर्बाद कर रही थी।
वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में योजना के कुल 25 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के खर्च पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि ये दोनों आंकड़े अभी शुरुआती आरोप हैं, फाइनल ऑडिट रिपोर्ट नहीं।
5. अब क्या होगा?
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि उन्होंने पिछले 10 साल की कथित अनियमितताओं की रिपोर्ट तैयार कर ली है। वह इसे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को सौंपेंगे और स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग करेंगे।
क्या थी स्वास्थ्य साथी योजना?
इस योजना को तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिसंबर 2016 में शुरू किया था। इसके तहत परिवार को सालाना 5 लाख रुपये तक फ्री इलाज मिलता था। प्रीमियम सरकार देती थी।
अब सवाल ये है – क्या गरीबों के इलाज के पैसे से खेल हुआ? जवाब स्वतंत्र जांच के बाद ही मिलेगा।













