7 या 8 सितंबर कब से शुरू होगा पितृ पक्ष? जानिए पूर्णिमा से लेकर सर्वपितृ अमावस्या तक की तिथियां और धार्मिक महत्व
मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान हमारे पूर्वज पितृ लोक से धरती लोक पर आते हैं और वह यह देखते हैं कि उनके परिवारीजन श्राद्ध कर्म कर रहे है या नहीं।
आसनसोल । शास्त्रों में पितृ पक्ष का खास महत्व होता है। शिल्पांचल के प्रख्यात पुरोहित निरंजन पांडेय ने बताया कि पितृ पक्ष में लोग अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध- तर्पण और ब्राह्राणों को भोज कराते हैं। जिससे उनकी आत्मा को मुक्ति मिलने के साथ मोक्ष की प्राप्ति हो सके। मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान हमारे पूर्वज पितृ लोक से धरती लोक पर आते हैं और वह यह देखते हैं कि उनके परिवारीजन श्राद्ध कर्म कर रहे है या नहीं। वहीं अगर उनके निमित्त सदस्य श्राद्ध कर्म कर रहे हैं तो वह सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। साथ ही पितृ दोष भी नहीं लगता है। वैदिक पंचांग के मुताबिक हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के साथ पितृपक्ष शुरू हो जाते हैं, जो आश्विन मास की अमावस्या को खत्म हो जाते हैं। इस साल के पितृ पक्ष की बात करें, तो वह 7 सितंबर 2025 से शुरू हो रहे हैं, जो 21 सितंबर को समाप्त हो रही है। जानिए पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध करने की तिथियां और महत्व…
श्राद्ध 2025 की सभी प्रमुख तिथियां और तारीख
प्रतिपदा श्राद्ध कब है : पितृपक्ष का पहला यानि प्रतिपदा का श्राद्ध 08 सितंबर 2025 को है।
द्वितीया श्राद्ध कब है : पितृपक्ष की दूसरी तिथि द्वितीया का श्राद्ध 09 सितंबर 2025 को रहेगा।
तृतीया श्राद्ध कब है : वहीं श्राद्ध पक्ष की तृतीया तिथि 10 सितंबर 2025 को है।
चतुर्थी श्राद्ध कब है : पितृपक्ष की चौथी तिथि यानि चतुर्थी का श्राद्ध भी 10 सितंबर 2025 के दिन करना उचित रहेगा।
पंचमी श्राद्ध कब है : पितृपक्ष की पांचवी तिथि यानि पंचमी का श्राद्ध 12 सितंबर 2025 को है।
षष्ठी श्राद्ध कब है : यदि आपके पितृ की मृत्यु षष्ठी तिथि से है तो आपको 12 सितंबर 2025 के दिन उनका श्राद्ध करना चाहिए।
सप्तमी श्राद्ध कब है : सप्तमी तिथि से जुड़े पितरों के लिए इस साल 13 सितंबर के दिन श्राद्ध करना उचित रहेगा।
अष्टमी श्राद्ध कब है : पितृपक्ष की अष्टमी तिथि का श्राद्ध 14 सितंबर 2025 को किया जाएगा।
नवमी श्राद्ध कब है : जिन पितरों की तिथि नवमी है, उनके लिए 15 सितंबर 2025 को श्राद्ध करना उचित रहेगा।
दशमी श्राद्ध कब है : श्राद्ध पक्ष की दशमी तिथि का श्राद्ध16 सितंबर 2025 को उनका शास्त्र सम्मत रहेगा।
पितृ पक्ष का महत्व
पितृपक्ष के दौरान पितरों का तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है। मान्यता है ऐसा करने से पितरों की आत्मा को मुक्ति मिलती है। साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों की प्राण त्यागने की तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन करने का विधान है। साथ ही उसके बाद दक्षिणा और वस्त्र देने का विधान है। वहीं आपको बता दें कि श्राद्ध पक्ष में पितृ- तर्पण और श्राद्ध कर्म करना नितान्त आवश्यक है। इससे स्वास्थ्य, समृद्धि, आयु, सुख- शान्ति, वंशवृद्धि एवं उत्तम सन्तान की प्राप्ति होती है। वहीं पितृपक्ष में कोई भी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, दुकान का मुहूर्त, नया कारोबार का आरंभ आदि नहीं करना चाहिए।





















