कुल्टी विधानसभा क्षेत्र के स्टेशनों पर तीन महत्वपूर्ण ट्रेनों का होगा ठहराव
आसनसोल । लंबे समय के इंतजार के बाद, आखिरकार कुल्टी की जनता की मेहनत रंग लाई। कुल्टी के भाजपा विधायक डॉ. अजय पोद्दार के अथक प्रयासों और रेलमंत्री से चली लंबी लड़ाई के बाद, कुल्टी विधानसभा के तीन प्रमुख स्टेशनों पर ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित हुआ है। डॉ. पोद्दार ने इसे सिर्फ़ एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि आम जनता की एकजुटता और संघर्ष की जीत बताया। तीन ट्रेनों का ऐतिहासिक तोहफा डॉ. पोद्दार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि ये ट्रेनों का तोहफा नहीं, बल्कि जनता की वर्षों पुरानी मांग का सम्मान है।
धनबाद-पटना एक्सप्रेस (13331/13332): कुल्टी स्टेशन पर इसका ठहराव 8 सितंबर से शुरू हो रहा है, जिससे यात्रियों को बिहार की ओर सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। गोरखपुर-संबलपुर मौर्य एक्सप्रेस (15028): बराकर स्टेशन पर इसका ठहराव भी 8 सितंबर से ही शुरू हो रहा है, जो उत्तर भारत के कई महत्वपूर्ण शहरों से सीधा जुड़ाव प्रदान करेगा। टाटा-बक्सर एक्सप्रेस (18183): सीतारामपुर स्टेशन पर इस ट्रेन के ठहराव की चर्चा ज़ोरों पर है, और उम्मीद है कि जल्द ही इसे भी मंजूरी मिल जाएगी। विकास की राह पर कुल्टी के विधायक डॉ. पोद्दार ने बताया कि इन ट्रेनों के ठहराव के साथ ही, स्टेशनों का कायाकल्प भी हो रहा है ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलें। कुल्टी स्टेशन, यहां रात में भी सुरक्षित आवाजाही के लिए पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की गई है। बराकर स्टेशन, यात्रियों की सुविधा के लिए यहाँ लिफ्ट और स्वच्छ पेयजल के लिए वॉटर कूलर लगाए जा रहे हैं। सीतारामपुर स्टेशन, प्रधानमंत्री के ‘अमृत भारत स्टेशन’ योजना के तहत इसका विकास किया जा रहा है, जो इसे भविष्य में एक आधुनिक और सुविधाओं से लैस हब बना देगा।
जनता के बीच विधायक प्रतिनिधि इस ऐतिहासिक मौके पर डॉ. अजय पोद्दार के साथ कुल्टी के युवा नेता और उपाध्यक्ष सह समाज सेवी टिंकू वर्मा, अमर प्रसाद, मनमोहन राय, सत्यजीत दास, काजल दास, कवि सिंह, सुनील भर, निर्मल माझी, उत्तम मंडल, और कुल्टी विधायक प्रतिनिधि विनोद सिंह सोलंकी भी मौजूद थे। डॉ. अजय पोद्दार ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “यह जीत मेरी नहीं, यह जीत हर उस नागरिक की है जिसने धैर्य रखा और संघर्ष में हमारा साथ दिया।” यह उपलब्धि दर्शाती है कि जब जनप्रतिनिधि और जनता मिलकर काम करते हैं, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।




















