आश्रय नामक एक होम के इंचार्ज और मैनेजर के खिलाफ लगाया गया संगीन आरोप
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आसनसोल । आसनसोल उत्तर थाना अंतर्गत डिपो पाड़ा इलाके के 3 नंबर बोरो कार्यालय के निकट 30 नंबर वार्ड स्थित आश्रय नामक एक होम के इंचार्ज और मैनेजर के खिलाफ संगीन आरोप लगाया गया। डिपो पाड़ा इलाके में रहने वाली समाजसेवी भादुरी हारी ने आरोप लगाया की आश्रय नामक इस होम के इंचार्ज होम में रहने वाले लोगों की ठीक से देखभाल नहीं करती है। उन्होंने बताया कि कुछ दिनों पहले होम में रहने वाले एक व्यक्ति की पत्नी ने उन्हें फोन किया था और कहा था कि उनके पति होम में गिर गए हैं। उनकी हड्डी टूट गई है। लेकिन उनका इलाज नहीं करवाया जा रहा है। इसके बाद उन्होंने स्थानीय पार्षद गोपा हालदार से संपर्क किया और उनके सलाह पर आहत व्यक्ति को पहले आसनसोल जिला अस्पताल लेकर गई।


लेकिन वहां पर इलाज संभव नहीं होने की वजह से आसनसोल के चेलीडंगाल के एक निजी नर्सिंग होम में लेकर गईं। भादुरी हारी ने बताया के नर्सिंग होम में उन्होंने अपने साथियों के सहयोग से उनका इलाज करवाया। अब वह धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहे हैं। लेकिन अब होम के इंचार्ज का कहना है कि यह सब कुछ उन्होंने किया। इसमें भादुरी हारी का कोई योगदान नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे भी बड़े अफसोस की बात यह है कि जिस परिवार के लिए उन्होंने यह सब कुछ किया। वह परिवार भी अब उनके साथ खड़ा नहीं हो रहा है।

इसी मुद्दे को लेकर शनिवार भादुरी हारि ने अपना विरोध दर्ज किया और कहा कि वह एक समाजसेवी है। वह हमेशा लोगों की सहायता करती है। लेकिन आश्रय की इंचार्ज ने जिस तरह से उनके साथ बर्ताव किया है। वह न काबिले बर्दाश्त है। वही इस बारे में जब पार्षद गोपा हालदार से बात की तो उन्होंने कहा कि यह पहला मौका नहीं है कि जबकि इस होम के प्रबंधन के खिलाफ अनियमितता के आरोप लगे हो। उन्होंने कहा कि जब वह व्यक्ति होम के अंदर गिर गए थे और उनका इलाज भी नहीं करवाया जा रहा था। तब भादुरी हारी ने उनसे बात की और उनका इलाज करवाया। अब वह धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहे हैं। लेकिन उनकी समझ में यह नहीं आ रहा है कि परिवार के लोग समाजसेवी महिला के योगदान को क्यों भूल रहे हैं। पार्षद ने कहा कि भादुरी हारी ने पीड़ित व्यक्ति के लिए काफी कुछ किया। लेकिन अब आश्रय की इंचार्ज कह रही हैं कि उन्होंने कुछ भी नहीं किया है। पार्षद ने बताया कि आनंद सिंह नामक एक व्यक्ति यहां पर काम करते थे। लेकिन अचानक उनका काम से हटा दिया गया है। इस बारे में जब उन्होंने आश्रय के मालिक को फोन करके कोलकाता से यहां आकर मामले को निपटने के लिए कहा तो उन्होंने उनकी बात नहीं सुनी और आनंद सिंह को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना ही काम से निकाल दिया गया। वही जब हमने इस पूरे प्रकरण पर आश्रय के इंचार्ज का पक्ष लेने का प्रयास किया तो 2 घंटे तक इंतजार करने के बाद भी वह पत्रकारों से बात करने के लिए सामने नहीं आई।













