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कृष्णा प्रसाद : ऐसे व्यक्ति समाज के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं जो व्यक्तिगत पीड़ा से ऊपर उठकर दूसरों की मदद को प्राथमिकता देते

आसनसोल । गंभीर चोट के बावजूद समाज सेवा करना अदम्य साहस और निस्वार्थ भावना का परिचायक है। ऐसे व्यक्ति समाज के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं जो व्यक्तिगत पीड़ा से ऊपर उठकर दूसरों की मदद को प्राथमिकता देते हैं। यह कोई कहावत नहीं है, इसे चरितार्थ कर दिखाया शिल्पांचल के विशिष्ट समाजसेवी, व्यवसायी सह धार्मिक प्रवृति के धनी और भाजपा के युवा नेता कृष्णा प्रसाद। सामाजिक कार्यक्रम में जाने के क्रम में उनकी हाथ में गंभीर चोट लगी। चोट इतनी गंभीर थी कि उनका सारे दिन का कार्यक्रम रद्द हो सकता था मगर उन्होंने अपनी परवाह न करके जरूरतमंदों के पहले से तय कार्यक्रम में आना उचित समझा। ऐसे महान समाजसेवी शायद ही कही मिलते हैं। कृष्णा प्रसाद ने बताया कि आज का दिन उनके जीवन का एक कठिन लेकिन आत्मबल से भरा हुआ दिन रहा। कार्यक्रम में जाने से ठीक पहले उनके हाथ में काफ़ी गंभीर चोट लग गई। उन्होंने कहा कि वार्ड नंबर 21 के सीतलाग्राम (बाउरी पाड़ा, नतुन पाड़ा) में कार्यक्रम पहले से तय था। चोट इतनी ज़्यादा थी कि हाथ हिलाना भी मुश्किल हो रहा था, दर्द असहनीय था लेकिन मन ने हार मानने से इनकार कर दिया। कार्यक्रम रद्द करने का विकल्प था, पर सेवा और संकल्प उससे कहीं बड़ा था। दर्द हाथ में था, पर ज़िम्मेदारी दिल में। दर्द भरे हाथ और भरे हुए हौसले के साथ मैं वहां पहुंचा, क्योंकि जिनके लिए कार्यक्रम था, उनकी ज़रूरत मेरे दर्द से बड़ी थी। वहीं उन्होंने कहा कि आज समझ आया सेवा तब नहीं रुकती जब शरीर थकता है, सेवा तब रुकती है जब इरादा टूटता है… और मेरा इरादा आज भी अडिग है। उन्होंने कहा कि सुबह से रात तक कंबल सेवा लगातार आज 10 दिन चला। इसी क्रम में उन्होंने कैलाशपुरी मंदिर, मॉडर्न सातग्राम की पावन भूमि पर महादेव के दिव्य दर्शन कर उन्होंने मंदिर जीर्णोद्धार के अपने संकल्प को पुनः पूर्ण श्रद्धा और दृढ़ निश्चय के साथ दोहराया। यह केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि उनके जीवन की वह प्रतिज्ञा है जिसे उन्होंने कहा कि अपनी अंतिम सांस तक निभाऊँगा। आज इसी पवित्र संकल्प के अंतर्गत मंदिर जीर्णोद्धार हेतु 50,000 रुपया की आर्थिक सेवा उनके द्वारा अर्पित की गई। यह सेवा महादेव के चरणों में समर्पण का एक छोटा-सा प्रयास है, ताकि सनातन धर्म की विरासत, आस्था और परंपराएँ सुरक्षित और सुदृढ़ बनी रहें। महादेव की कृपा से सनातन की सेवा अनवरत चलती रहे, यही उनका संकल्प है।
जब तक श्वास है, तब तक सेवा है। हर हर महादेव।
उसके बाद आसनसोल नगर निगम के 20 नंबर वार्ड में ही स्थित पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध चंद्रचूड़ बाबा मंदिर में जब दर्शन के लिए पहुँचा, तो ऐसा लगा मानो वहाँ गौ माता मेरी ही राह देख रही थी। उस क्षण मन ने यही कहा कि आज की सेवा यहीं से आगे बढ़नी चाहिए।
गौ माता की सेवा कर, उनके प्रति अपना कर्तव्य निभाकर, उसी आशीर्वाद के साथ कंबल सेवा को आगे बढ़ाया गया। वह पल केवल एक संयोग नहीं था, बल्कि सेवा के मार्ग पर मिला एक दिव्य संकेत था कि जब नीयत सच्ची हो, तो प्रभु स्वयं रास्ता दिखाते हैं। इसी पावन स्थल पर पूरे पश्चिम बंगाल के सभी लोगों के स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की कामना के लिए पूजा-अर्चना की गई। तीन झुरी अर्पित की गईं, इस संकल्प के साथ कि बंगाल में सकारात्मक परिवर्तन आए और हम सच्चे मन से पश्चिम बंगालवासियों की सेवा कर सकें। सेवा, संवेदना और समर्पण के भाव के साथ जरूरतमंदों तक कंबल पहुँचाने का यह प्रयास निरंतर जारी है। बाबा चंद्रचूड़ और गौ माता का आशीर्वाद हम सभी पर बना रहे।

 

       

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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