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पर्दे के पीछे लूटपाट का बोलबाला है, सालनपुर में झारखंड लॉटरी का दबदबा कायम है – क्या प्रशासन जानबूझकर चुप्पी साधे हुए है?

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सालानपुर । सालानपुर ब्लॉक में अब सिर्फ एक ही कानून है, वो भी लागू नहीं होता। अवैध झारखंड लॉटरी का धंधा, जिसे कानूनी लॉटरी का नाम दिया गया है, ब्लॉक के एक छोर से दूसरे छोर तक खुलेआम चल रहा है। दिन दहाड़े, बेशर्मी से। ये गिरोह इतना आश्वस्त है कि कोई सवाल नहीं उठाएगा, कोई उन्हें पकड़ नहीं पाएगा।
सूत्रों का दावा है कि इस अवैध साम्राज्य का सरगना रालाब है। यह नाम नया नहीं है, न ही आरोप नया है। गौरांडी, लालगंज, लाहट, धुंधाबाद, समदी, अचारा, डेंडुआ-सालानपुर ब्लॉक के नक्शे पर जहां भी नजर पड़े, रालाब की छाया दिखाई देती है। सिर्फ रालाब ही नहीं, बल्कि पिंटू, राजीव, बिस्वजीत, प्रकाश, आकाश, चंदन और कई अन्य लोग भी इसमें शामिल हैं। आरोपों के अनुसार, ये सिर्फ विक्रेता नहीं हैं, बल्कि इनमें से प्रत्येक एक पहिया है – वह पहिया जिस पर अवैध लॉटरी मशीन घूम रही है।
सबसे सनसनीखेज आरोप यह है कि यह कारोबार पुलिस की ‘छतरी’ में चल रहा है। कुल्टी-आसनसोल के बड़े पुलिस अधिकारियों के नाम चाय की दुकानों से लेकर बाजारों तक कानाफूसी में गूंज रहे हैं। बड़ी रकम का नियमित लेन-देन हो रहा है और प्रशासन उस पैसे के बदले आंखें मूंद रहा है। यही कारण है कि न तो कोई छापेमारी होती है, न कोई गिरफ्तारी, न ही कोई सील या तालाबंदी। रूपनारायणपुर बाजार क्षेत्र में तो स्थिति और भी भयावह है। एक तरफ झारखंड लॉटरी के टिकट बिक रहे हैं, तो दूसरी तरफ मोबाइल नंबर बुकिंग और ऑनलाइन लेनदेन। खुलेआम अवैध कारोबार चल रहा है, लेकिन डीडी (डिफेंसिव डायरेक्ट) इसे दबा रहा है।विभाग और पुलिस की उपस्थिति शून्य है।
और भी व्यंग्यपूर्ण बात – कई लोग पूछते हैं, क्या सालानपुर पुलिस स्टेशन वास्तव में काम कर रहा है? कोई प्रभारी नहीं, कोई निगरानी नहीं – क्या इस प्रशासनिक शून्यता का इस्तेमाल ढाल के रूप में किया जा रहा है जिसके बल पर यह लॉटरी घोटाला फल-फूल रहा है?
आज सालानपुर में सवाल बेहद तीखा है – क्या कानून सिर्फ आम लोगों के लिए है? या फिर प्रशासन अब अवैध लॉटरी के प्रभाव में मूकदर्शक बना हुआ है?

 

 

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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