Shilpanchal Today

Latest News in Hindi

बर्नपुर में सर बीरेन मुखर्जी की कांस्य प्रतिमा का अनावरण, चौक का नामकरण “सर बीरेन मुखर्जी चौक”

बर्नपुर, 23 मई 2026। भारतीय इस्पात उद्योग के शिल्पकार और 1960 के दशक में इस्को को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले सर बीरेन मुखर्जी को श्रद्धांजलि देते हुए 22 मई की शाम बर्नपुर में ऐतिहासिक समारोह आयोजित हुआ। सेल-इस्को स्टील प्लांट के फ्लाईओवर के पास स्थित चौराहे पर निदेशक प्रभारी सूरजित मिश्रा ने सर बीरेन मुखर्जी की कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया।

“सर बीरेन मुखर्जी चौक” नामकरण
इस मौके पर सूरजित मिश्रा ने प्रतिमा स्थल के पास स्थित चौक का औपचारिक रूप से “सर बीरेन मुखर्जी चौक” नामकरण करते हुए शिलापट्ट का भी अनावरण किया। समारोह में संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे।

“योगदान अतुलनीय, सम्मान पहले मिलना चाहिए था” : सूरजित मिश्रा
सर बीरेन मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए निदेशक प्रभारी सूरजित मिश्रा ने कहा, “ऐसे दूरदर्शी उद्योगपति की प्रतिमा का अनावरण करना मेरे लिए गौरव और सौभाग्य की बात है। बर्नपुर और भारतीय इस्पात उद्योग के विकास में सर बीरेन मुखर्जी का योगदान अतुलनीय रहा है। यह सम्मान उन्हें बहुत पहले ही मिल जाना चाहिए था।”

इस्को के विकास के सूत्रधार थे सर बीरेन मुखर्जी
सर बीरेन मुखर्जी को इस्को के अभूतपूर्व विकास का प्रमुख सूत्रधार माना जाता है। उनके नेतृत्व में ही बर्नपुर पूर्वी भारत के प्रमुख औद्योगिक नगरों में स्थापित हुआ और इस्पात उत्पादन में उत्कृष्टता का प्रतीक बना। बाद में इस्को, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के अंतर्गत वर्तमान इस्को स्टील प्लांट के रूप में विकसित हुआ।

एक प्रख्यात उद्योगपति और राष्ट्रवादी उद्यमी के रूप में सर बीरेन मुखर्जी ने स्वतंत्रता-पूर्व और स्वतंत्रता-उपरांत भारत में स्वदेशी इस्पात उद्योग को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। वे देश की कई औद्योगिक और इंजीनियरिंग परियोजनाओं से जुड़े रहे। दूरदृष्टि, संस्थान निर्माण क्षमता और औद्योगिक आत्मनिर्भरता के लिए उन्हें व्यापक सम्मान मिला।

“बीरेनपुर” नामकरण की पुरानी मांग
बर्नपुर के लोगों के बीच सर बीरेन मुखर्जी की विरासत से गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। लंबे समय से बड़ी संख्या में नागरिक शहर का नाम “बीरेनपुर” करने की मांग उठाते रहे हैं।

यह समारोह न सिर्फ एक महान उद्योगपुरुष को श्रद्धांजलि था, बल्कि बर्नपुर की औद्योगिक विरासत और गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल रहा।

 

  

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *