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NEET के लिए वायुसेना, पर करदाताओं को समय पर न्याय नहीं: आसनसोल के व्यवसायी सुरेन जालान ने उठाए सरकार-न्यायपालिका पर सवाल’

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आसनसोल, 31 मई 2026। आसनसोल के विशिष्ट व्यवसायी सुरेन जालान ने देश की न्यायिक व्यवस्था और नेताओं की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि NEET जैसी परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र पहुंचाने को वायुसेना का सहारा लिया जाता है, लेकिन करोड़ों करदाताओं को समय पर न्याय नहीं मिलता। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

‘करदाता 100 गुना ज्यादा, फिर भी न्याय में देरी क्यों?’
सुरेन जालान ने बयान जारी कर कहा:

“भारतवर्ष के सभी छोटे-बड़े करदाताओं का दुर्भाग्य है कि आज NEET परीक्षार्थियों के लिए क्वेश्चन पेपर सुरक्षित पहुंचाने को हमें वायुसेना का सहारा लेना पड़ता है। जबकि करदाताओं की संख्या इन परीक्षार्थियों से लगभग 100 गुना अधिक है, फिर भी उन्हें नेताओं और न्यायपालिका से सही समय पर उचित न्याय नहीं मिलता। यह सोचनीय विषय है।”

‘सेना के हाथ में सौंप दें न्यायपालिका की रक्षा का दायित्व’
जालान ने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह NEET के लिए वायुसेना की सेवा ली गई, वह वर्तमान सरकार पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।

“मैं इसी निर्णय को लेकर भारत के संविधान एवं न्यायपालिका की रक्षा का दायित्व भी सेना के हाथ सौंप देना उचित समझता हूं। जिस देश में मंत्रालय पद को लेकर मंत्रियों को इतनी चिंता करनी पड़ती है, आखिर क्यों? यह जनता के लिए सोचने का विषय है।”

‘हर आपदा में सेना, फिर न्याय में देरी क्यों?’
सुरेन जालान ने भारतीय सेना के योगदान को याद करते हुए कहा कि देश की हर आपदा में सेना ही आगे आती है।

“चाहे प्राकृतिक आपदा हो, घुसपैठियों की विपदा हो या शांतिपूर्ण निर्वाचन कराना हो, सेना को ही त्याग और बलिदान देना पड़ता है। भारतीय सेना की औसत आय 60-70 हजार तक सीमित है, फिर भी उनका खून-पसीना देशभक्ति और ईमानदारी का परिचय देता है।”

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और नेताओं के लिए समय सीमा की कोई प्रतिबद्धता नहीं है, जबकि सेना हर मोर्चे पर समय पर ड्यूटी निभाती है।

राष्ट्रपति-PM से अपील: ‘करदाताओं के लिए बने अलग सैन्य न्यायालय’
व्यवसायी सुरेन जालान ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से अपील की है:

“जिन करदाताओं के पैसे से देश की संचालन व्यवस्था चल रही है, उनके लिए भी सेना की न्यायपालिका के द्वारा समय सीमा के साथ अलग से सैन्य न्यायालय बनाया जाए। करदाताओं को भी सुरक्षा के साथ समय पर न्याय मिलना चाहिए।”

 

  

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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