सच्चा ईसाई प्रलोभन से नहीं, आचरण से प्रेरित करता है’: जॉर्ज ओस्टा कहा- ‘आस्था निजी विषय, जबरन धर्म परिवर्तन की निंदा करता हूं’
आसनसोल, 7 जून। बर्नपुर में धर्मांतरण के आरोपों के बीच एक प्रेस वक्तव्य जारी कर शिक्षाविद् और प्रेरणादायक वक्ता जॉर्ज ओस्टा ने स्पष्ट किया कि रोमन कैथोलिक चर्च न तो बलपूर्वक धर्मांतरण का समर्थन करता है और न ही प्रलोभन या दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा गया कि आस्था पूरी तरह व्यक्तिगत विषय है और इसे केवल व्यक्ति की स्वतंत्र इच्छा और अंतःकरण से ही अपनाया जाना चाहिए।
यीशु की शिक्षाओं का साक्ष्य आचरण से मिलता है
जॉर्ज ओस्टा ने कहा गया, “एक सच्चा ईसाई दूसरों को यीशु मसीह का अनुसरण करने के लिए सांसारिक सुख-सुविधाओं या भौतिक लाभों का प्रलोभन देकर प्रेरित नहीं करता। वह अपने जीवन को विश्वास, सत्यनिष्ठा, करुणा और सेवा के मूल्यों पर आधारित बनाकर प्रेरित करता है। यीशु मसीह की शिक्षाओं का वास्तविक साक्ष्य व्यक्ति के आचरण और जीवनशैली से प्रकट होता है।
मिशनरियों के नाम का दुरुपयोग संभव
उन्होंने आशंका जताई कि कुछ व्यक्ति या समूह निजी स्वार्थ के लिए ईसाई मिशनरियों के नाम का दुरुपयोग कर सकते हैं। “ऐसे कृत्य ईसाई धर्म और चर्च की मूल शिक्षाओं के अनुरूप नहीं हैं। इन्हें ईसाई समुदाय या चर्च का प्रतिनिधि नहीं माना जाना चाहिए।
जबरन धर्मांतरण की कड़े शब्दों में निंदा
जॉर्ज ओस्टा ने कहा “मैं व्यक्तिगत क्षमता में किसी भी प्रकार के बलपूर्वक धर्मांतरण अथवा लालच, प्रलोभन, दबाव या अनुचित माध्यम से धर्म परिवर्तन के प्रयासों की स्पष्ट और कड़े शब्दों में निंदा करता हूं।”
संविधान देता है धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार’
जॉर्ज ओस्टा ने याद दिलाया कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का धर्म मानने, पालन करने और प्रचार करने का अधिकार देता है। “लेकिन धर्म से संबंधित कोई भी निर्णय पूर्णतः स्वतंत्र, स्वैच्छिक और व्यक्तिगत विश्वास पर आधारित होना चाहिए। धार्मिक स्वतंत्रता तभी सार्थक है जब उसका प्रयोग सूचित निर्णय और सच्ची आस्था के आधार पर हो।”















