आसनसोल: महरानी स्थान मंदिर में द्वितीय सोमवारी पर छाया पार्वती स्वरूप का अद्भुत नजारा, हरे वस्त्रों में झूम उठीं सैकड़ों महिलाएं
आसनसोल । श्रावण माह की द्वितीय सोमवारी पर मुर्गासाल स्थित प्राचीन महरानी स्थान मंदिर भक्ति और उल्लास का केंद्र बन गया। यहां श्रद्धा और संस्कृति का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने पूरे अंचल को भावविभोर कर दिया।
इस अंचल की सैकड़ों महिलाएं पूरे सावन माह प्रतिदिन भगवान भोलेनाथ की पूजा के लिए मंदिर आती हैं। सोमवार का दिन उनके लिए खास था। सभी महिलाएं मां पार्वती के स्वरूप में सज-धज कर मंदिर पहुंचीं।
हरियाली से सराबोर हुआ मंदिर परिसर
महिलाओं ने हरे रंग की साड़ियां, हरी चूड़ियां, हाथों में मेहंदी और पूर्ण श्रृंगार धारण किया था। पार्वती स्वरूप में सजी इन महिलाओं ने जैसे पूरे मंदिर को ही हरियाली से सजा दिया।
उन्होंने विधि-विधान से भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना की। इसके बाद सामूहिक भजन-कीर्तन और धार्मिक नृत्य प्रस्तुत किया। “हर हर महादेव” और “बोल बम” के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
भक्ति और एकता का संदेश
सैकड़ों महिलाओं की एक साथ उपस्थिति, उनकी श्रद्धा और झूम-झूम कर किया गया कीर्तन द्वितीय सोमवारी का मुख्य आकर्षण बना। महिलाओं के उत्साह और समर्पण ने सावन की परंपरा को और जीवंत कर दिया।
स्थानीय लोगों ने इस आयोजन की खूब सराहना की। लोगों का कहना है कि ऐसे आयोजन से न सिर्फ सोमवारी का महत्व बढ़ता है, बल्कि क्षेत्र में भक्ति, संस्कृति और सामाजिक एकता* का संदेश भी जाता है।
महरानी स्थान की महिमा
उल्लेखनीय है कि महरानी स्थान मंदिर आसनसोल का एक अत्यंत प्राचीन और प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल है। यहां हर सोमवारी को महिलाएं भजन-कीर्तन कर सावन को भक्तिमय बनाती हैं। यह परंपरा वर्षों से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही है।
द्वितीय सोमवारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आसनसोल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं आज भी पूरे उत्साह और आस्था के साथ जीवित हैं।














