“तुलसीदास जयंती 2026: रामचरितमानस ने राम को राजमहल से निकालकर जन-जन के हृदय तक पहुंचाया”
आसनसोल । आज देशभर में भक्तिकाल के महान संत गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह तिथि श्रावण शुक्ल सप्तमी को पड़ती है।
लोकभाषा में रामकथा के प्रणेता
तुलसीदास केवल कवि नहीं, बल्कि भारतीय भक्ति और हिंदी साहित्य के आधार स्तंभ थे। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना ‘रामचरितमानस’ ने भगवान श्रीराम की कथा को संस्कृत से निकालकर अवधी जैसी लोकभाषा में आम जन तक पहुंचाया।
रामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है। इसमें परिवार, समाज, कर्तव्य, त्याग, सेवा और नैतिकता का संदेश है। इसी वजह से यह गांव की चौपाल से लेकर घर-घर में पाठ तक भारतीय संस्कृति का हिस्सा बन गया।
हनुमान चालीसा से विनय पत्रिका तक
तुलसीदास की रचनाएं सिर्फ रामचरितमानस तक सीमित नहीं हैं। हनुमान चालीसा, विनय पत्रिका, कवितावली, गीतावली जैसी रचनाएं भी आज करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। हनुमान चालीसा की लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि उनकी रचनाएं समय और सीमाओं से परे हैं।
तुलसीदास के राम = मर्यादा और कर्तव्य
तुलसीदास ने राम को केवल राजा नहीं, बल्कि मर्यादा, धर्म और लोककल्याण का आदर्श बताया। उनके राम पिता के वचन के लिए राजपाट छोड़ते हैं, हर वर्ग से जुड़ते हैं और सत्ता को जिम्मेदारी मानते हैं।
आज क्यों प्रासंगिक हैं तुलसीदास?
आज की भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी में तुलसीदास हमें चरित्र, कर्तव्य, करुणा और परिवार का महत्व समझाते हैं। उनकी सबसे बड़ी सीख यही है कि सफलता धन से नहीं, चरित्र से मापी जाती है।
निष्कर्ष:
तुलसीदास जयंती केवल एक संत का स्मरण नहीं है। यह हमें याद दिलाने का दिन है कि रामचरितमानस को सिर्फ पढ़ना नहीं, उसके संदेश को जीवन में उतारना है।
गोस्वामी तुलसीदास जी को शत-शत नमन।















