“पैसे के लिए शर्मसार हुई मानवता: ई-मेल की एक शिकायत से खुला आसनसोल का नवजात तस्करी रैकेट, 1 लाख में बिका 2 महीने का बच्चा, 3 गिरफ्तार”
आसनसोल । एक ई-मेल ने पूरे रैकेट का पर्दा खोल दिया। पैसे के लालच में एक 2 महीने के मासूम को सौदे की वस्तु बना दिया गया। आसनसोल पुलिस की जांच में नवजात बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त का बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले में अब तक 3 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
कैसे शुरू हुई जांच
पुलिस के अनुसार कुछ दिन पहले उन्हें ई-मेल के जरिए एक गोपनीय शिकायत मिली थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आसनसोल के एक इलाके में एक दंपति ने अवैध तरीके से एक नवजात को रखा हुआ है।
शिकायत मिलते ही डीसीपी के निर्देश पर पुलिस टीम ने तुरंत जांच शुरू की। गुप्त सूचना के आधार पर उत्तर धादका में छापेमारी की गई।
घर से बरामद हुआ 2 महीने 13 दिन का शिशु
पुलिस को विनोद कुमार गुप्ता (47) और उनकी पत्नी बबिता गुप्ता (37) के घर से 2 महीने 13 दिन का एक नवजात बालक मिला।
पूछताछ में दंपति ने पहले बच्चे को अपना जैविक बेटा बताया। लेकिन जब कागजात मांगे गए और सख्ती से पूछताछ हुई तो दंपति टूट गए और सच उगल दिया।
सिउड़ी के नर्सिंग होम से हुई 1 लाख की डील
जांच में खुलासा हुआ कि इस बच्चे को बीरभूम जिले के सिउड़ी स्थित एक निजी नर्सिंग होम से 1 लाख रुपये नकद देकर खरीदा गया था।
इस पूरे सौदे को अंजाम देने में बिचौलिये अशोक भावलुका की अहम भूमिका थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सिउड़ी में नर्सिंग होम से जुड़े कुछ और लोगों के नाम भी सामने आए हैं जिनसे पूछताछ की जा रही है।
आरोप है कि बच्चे को लेने के लिए सरकार की तय दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। इसके साथ ही दंपति को असली माता-पिता दिखाने के लिए जन्म प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों में हेराफेरी भी की गई।
CWC को सौंपा गया बच्चा, BNS और JJ Act में केस
बच्चे की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने उसे तत्काल संरक्षण में लिया और आगे की देखभाल के लिए पश्चिम बर्धमान जिला चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के चेयरमैन को सौंप दिया है।
फिलहाल इस मामले में विनोद गुप्ता, बबिता गुप्ता और बिचौलिया अशोक भावलुका को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत मामला दर्ज किया है।
अब किस-किस पर है पुलिस की नजर
डीसीपी ने बताया कि जांच कई बिंदुओं पर केंद्रित है:
1. असली माता-पिता की तलाश: बच्चे के जैविक माता-पिता कौन हैं और बच्चा कहां से लाया गया
2. दस्तावेजों की जांच: जन्म प्रमाणपत्र असली है या फर्जी, किसने बनवाया
3. नर्सिंग होम की भूमिका: सिउड़ी के नर्सिंग होम का स्टाफ और प्रबंधन कितना शामिल है
4. पैसे का लेन-देन: इस रैकेट में अब तक कितने सौदे हुए और कितने रुपये का लेन-देन हुआ
पुलिस का कहना है कि इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पूरे रैकेट को तोड़ने के लिए बीरभूम और आसनसोल पुलिस संयुक्त रूप से काम कर रही है।














