“मानुषेर साथे, मानुषेर पाशे: आसनसोल GRP का मानवीय चेहरा, 31 चोरी-गुमशुदा मोबाइल लौटाए, रक्तदान शिविर में उमड़ी भीड़”
आसनसोल । “लोगों के साथ, लोगों के पास” के मूलमंत्र के साथ आसनसोल जीआरपीएस, हावड़ा जीआरपी डिस्ट्रिक्ट ने एक बार फिर जनता का दिल जीत लिया। पुलिस ने न सिर्फ चोरी और खोए हुए मोबाइल उनके असली मालिकों को वापस किए, बल्कि रक्तदान शिविर लगाकर मानवता की मिसाल भी पेश की।
IPS इन्द्रजीत बासु ने किया उद्घाटन
इस विशेष कार्यक्रम का उद्घाटन हावड़ा जीआरपी के IPS एसआरपी इन्द्रजीत बासु और डिप्टी एसआरपी कौशिक चटर्जी के हाथों हुआ।
कार्यक्रम में आसनसोल जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी संजीत चटर्जी, GRPS इंस्पेक्टर गोपी नाथ दत्ता सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और जवान मौजूद रहे।
31 खोए हुए मोबाइल सौंपे गए
कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि रही खोए हुए और चोरी हुए मोबाइलों की वापसी।
पुलिस की तकनीकी टीम ने पिछले कुछ महीनों में ट्रेस किए गए 31 मोबाइल फोन को उनके असली मालिकों को सम्मानपूर्वक वापस सौंपा। मोबाइल पाकर लोगों की आंखें नम हो गईं।
IPS इन्द्रजीत बासु ने इस मौके पर कहा:
“पुलिस का काम सिर्फ अपराध रोकना नहीं है, बल्कि जनता की सेवा करना भी है। जब हम किसी का खोया हुआ सामान लौटाते हैं तो जनता का हम पर भरोसा और मजबूत होता है। यही ‘मानुषेर साथे, मानुषेर पाशे’ का असली मतलब है।”
रक्तदान शिविर में दिखाई एकजुटता
मोबाइल वितरण के साथ-साथ कार्यक्रम स्थल पर रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया। आसनसोल जिला अस्पताल के ब्लड बैंक के सहयोग से लगे इस शिविर में पुलिसकर्मियों के अलावा आम लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
ब्लड बैंक प्रभारी संजीत चटर्जी ने कहा:
“एक यूनिट रक्त तीन जिंदगियां बचा सकता है। पुलिस द्वारा इस तरह का शिविर लगाना समाज के लिए एक बड़ा संदेश है।”
GRPS इंस्पेक्टर का बयान
GRPS इंस्पेक्टर गोपी नाथ दत्ता ने बताया कि ट्रेनों और स्टेशनों में यात्रियों के गुम होने वाले सामान को ट्रेस करने के लिए विशेष सेल बनाई गई है।
उन्होंने कहा:
“हमारा लक्ष्य है कि किसी भी यात्री का सामान खो जाए तो वो बेझिझक हमसे संपर्क करे। हम उसे वापस दिलाने की पूरी कोशिश करेंगे।”
पुलिस के इस मानवीय पहल की आम जनता और यात्रियों ने जमकर सराहना की।














