विद्रोही कवि काजी नजरुल इस्लाम को 50वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि, डॉ. अजय पोद्दार बोले – उनकी कलम आज भी अन्याय के खिलाफ लड़ना सिखाती है
कुल्टी । बांग्ला साहित्य के विद्रोही कवि, समानता और मानवता के अमर गायक काजी नजरुल इस्लाम की 50वीं पुण्यतिथि के अवसर पर पूरे शहर में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। साहित्य के माध्यम से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंकने वाले नजरुल की रचनाएं आज 50 साल बाद भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी तब थीं।
इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में प्रबुद्धजनों ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद किया।
डॉ. अजय कुमार पोद्दार ने दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में समाजसेवी और शिक्षाविद डॉ. अजय कुमार पोद्दार ने काजी नजरुल इस्लाम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा, “काजी नजरुल इस्लाम सिर्फ एक कवि नहीं, बल्कि एक विचार थे। उनकी लेखनी ने हमेशा अन्याय, शोषण और असमानता के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने अपनी कविताओं और गीतों के माध्यम से हिंदू-मुस्लिम एकता, धार्मिक समन्वय और इंसानियत का जो संदेश दिया, उसकी जरूरत आज के समाज को सबसे ज्यादा है।”
नई पीढ़ी के लिए आज भी प्रेरणास्रोत हैं नजरुल
डॉ. पोद्दार ने आगे कहा कि नजरुल इस्लाम की साहित्यिक विरासत अमूल्य है। उनकी प्रसिद्ध रचनाएं जैसे ‘विद्रोही’, ‘अग्नि-वीणा’ आज भी युवाओं में जोश भर देती हैं। उनकी कविताओं में स्वतंत्रता की ललक, प्रेम की गहराई और धर्मनिरपेक्षता की मजबूत चेतना देखने को मिलती है। उन्होंने धर्म और जाति की दीवारों को तोड़कर सिर्फ इंसानियत की बात की।
आसनसोल का काजी नजरुल इस्लाम से गहरा नाता रहा है, इसलिए यहां के लोगों के दिलों में उनके लिए एक विशेष सम्मान है।
50वीं पुण्यतिथि के अवसर पर विद्रोही कवि को शत-शत नमन करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना ही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।














