दुर्गापुर की किस्मत चमकाने वाला प्रोजेक्ट, ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का सबसे अहम नोड बनेगा स्टील सिटी
दुर्गापुर । कभी बंगाल की औद्योगिक राजधानी कहे जाने वाले दुर्गापुर के अच्छे दिन फिर लौटने वाले हैं। केंद्र सरकार के बजट 2026-27 में दुर्गापुर के लिए एक बड़ी घोषणा की गई है, जिससे पूरे पूर्वी भारत में निवेश और रोजगार का नया रास्ता खुलेगा। सरकार ने दुर्गापुर को देश के महत्वाकांक्षी Integrated East Coast Industrial Corridor का एक अहम नोड बनाने का फैसला किया है।
यह सिर्फ एक सड़क या रेल प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि दुर्गापुर को नए भारत की मैन्युफैक्चरिंग पावर बनाने की तैयारी है।
क्या है ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर?
सरकार की योजना ऐसे आधुनिक औद्योगिक शहर बसाने की है, जहाँ उद्योग लगाने के लिए सब कुछ पहले से तैयार हो। इसे Plug-and-Play मॉडल कहा जाता है। यानी बेहतर सड़क और रेल कनेक्टिविटी, 24 घंटे बिजली-पानी, और तैयार फैक्ट्री शेड। इससे कोई भी कंपनी आसानी से आकर अपना प्लांट लगा सकती है और अपने प्रोडक्ट को देश-विदेश के बाजारों तक तेजी से पहुंचा सकती है।
दुर्गापुर ही क्यों? – वजह है मजबूत नींव
इस कॉरिडोर के लिए दुर्गापुर को चुनने की सबसे बड़ी वजह है इसका पहले से मौजूद मजबूत औद्योगिक आधार। यहां Durgapur Steel Plant (DSP) के अलावा Alloy Steels, DVC, और सैकड़ों छोटी-बड़ी इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां पहले से काम कर रही हैं। यानी यहां हुनरमंद लोग हैं, उद्योग का माहौल है और जमीन है। बस जरूरत थी बेहतर कनेक्टिविटी और नए निवेश की, जो अब इस कॉरिडोर से पूरी होगी।
बजट में ₹3000 करोड़ का प्रावधान
इस सपने को जमीन पर उतारने के लिए केंद्र ने बजट 2026-27 में National Industrial Corridor Development and Implementation Trust (NICDIT) के लिए ₹3,000 करोड़ का भारी-भरकम प्रावधान किया है। देशभर में 11 इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर काम चल रहा है और दुर्गापुर से तूतीकोरिन तक फैला ईस्ट कोस्ट कॉरिडोर उनमें सबसे अहम माना जा रहा है।
रोजगार की नई उम्मीद
अगर यह प्रोजेक्ट समय पर लागू होता है तो दुर्गापुर में सिर्फ बड़े कारखाने ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन, ट्रांसपोर्ट और इंजीनियरिंग सर्विस से जुड़े हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। यह पुराने औद्योगिक शहर दुर्गापुर को नई अर्थव्यवस्था से जोड़ने का सुनहरा मौका है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि घोषणा से तुरंत फैक्ट्री नहीं लग जाती। इसका असली फायदा तभी मिलेगा जब जमीन अधिग्रहण और निवेश की प्रक्रिया तेजी से पूरी होगी।














