बंगाल छोड़ने वाला था देश का नंबर-1 शूटर, अब CM ने दिया 25 लाख का सम्मान
जर्मनी में वर्ल्ड रिकॉर्ड, बंगाल में उपेक्षा; अब जाकर मिला ‘अटल खेल सम्मान’
आसनसोल । देश-विदेश में एकाधिक सोने के पदक जीतकर ट्रॉफी कैबिनेट भर चुके हैं, 18 साल की उम्र में ही शूटिंग में सफलता की चोटी पर हैं। लेकिन अपने ही राज्य से कोई मदद तो दूर, मामूली स्वीकृति भी नहीं मिल रही थी। इसी का मलाल उन्हें खाए जा रहा था। नाराज होकर एक समय बंगाल छोड़ने की बात भी सोच ली थी। वो हैं अभिनव साव। आखिरकार मलाल मिटा। आसनसोल के इस युवा शूटर को अपने ही राज्य से स्वीकृति मिली। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के हाथों से मिला ‘अटल खेल सम्मान’ और साथ में सरकार की तरफ से 25 लाख रुपये।
रविवार सुबह फोन पर अभिनव की प्रतिक्रिया थी – “घर की स्वीकृति का स्वाद ही अलग है।”
बंगाल छोड़ने की भावना पर अभिनव ने कहा था – “विदेश से एकाधिक पदक जीतने के बाद भी बंगाल से मदद नहीं मिली। स्वीकृति भी नहीं मिली। शूटिंग के अभ्यास में सुविधा होगी यह सोचकर अमृतसर के कॉलेज में भर्ती हुआ था। तय कर लिया था, भविष्य में किसी और राज्य की तरफ से प्रतियोगिता में उतरूंगा। लेकिन अब और नहीं सोच रहा। बंगाल के लिए ही खेलूंगा।”
बताया जा रहा है कि सप्ताह भर पहले राज्य के नए क्रीड़ामंत्री डॉ. इंद्रनील खां ने अभिनव और उनके पिता से बात की थी। वहीं सरकार की तरफ से मदद का आश्वासन दिया था। उसके बाद ही फैसला पलटा साव परिवार ने।
जर्मनी में वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ गोल्ड:
जर्मनी में विश्व जूनियर शूटिंग चैंपियनशिप में 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम में सोना जीता है अभिनव ने। राष्ट्रीय खेलों में भी ब्रॉन्ज आया है उनकी झोली में। अभिनव के ट्रॉफी कैबिनेट में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीते एकाधिक पदक हैं। फिलहाल उनकी नजर 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर है और उसी लक्ष्य की तैयारी कर रहे हैं। जूनियर में अभी अभिनव देश में एक नंबर, सीनियर में छह नंबर पर हैं।
अभिनव के पिता रूपेश कुमार साव ने कहा, “मेरा शूटर होने का सपना था। लेकिन अभाव के संसार में वह हो नहीं पाया। इसलिए अभिनव के जन्म के बाद ही तय कर लिया था उसे शूटर बनाऊंगा। बीच में अनेक सफलता मिली है। इतने दिनों बाद वह राज्य सरकार की तरफ से स्वीकृति पाया, यह अलग ही तृप्ति दे रहा है। क्रीड़ामंत्री ने हमें कहा था, ट्रेनिंग के बाहर अन्य कुछ लेकर सिर न खपाएं। पैसों के लिए सरकार देखेगी। इस बार सरकार से सम्मान पाकर अभिनव का दायित्व बढ़ गया है। ओलंपिक को ध्यान में रखकर हम आगे बढ़ रहे हैं। वह जो आर्थिक सहायता पाया, उससे अब और उन्नत ट्रेनिंग ले पाएगा। विदेश की माटी में, विदेशी कोच के पास ट्रेनिंग पाने से अभिनव भविष्य में और भी सफलता पाएगा, यही मेरा विश्वास है।”














